कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में पदस्थ रहीं निलंबित DSP नेहा पचिसिया (Neha Pachisia) देश भर में चर्चा का केंद्र बनी हुईं हैं। नेहा ने जनता का पुलिस प्रशासन पर से भरोसा उठा दिया है। नेहा ने हत्या के आरोपित की जमानत कराने के लिए परिवार जनों से करोड़ों की जमीन का सौदा मिट्टी के भाव में किया था।
शुरुआती जांच में पुष्टि होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे में पुलिस पर यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि ‘जब रक्षक ही बन जाएं लुटेरे, तो जनता किस पर करे भरोसा?’
दरअसल, नेहा पचिसिया मामला पुलिस पद के दुरुपयोग और जमीन हड़पने से जुड़ा है, जिसमें कटनी की तत्कालीन सीएसपी पर एक हत्या के आरोपी के परिवार को जमानत का झांसा देकर उनकी 83 लाख की जमीन को महज 18.20 लाख में अपने करीबियों के नाम दर्ज कराने का आरोप है।
निलंबित DSP नेहा पचिसिया व उनके दो करीबियों पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। इस मामले की जांच के दायरे में DSP पचिसिया की मदद करने वाले कई अधिकारी और पुलिस कर्मी भी आ रहे हैं। इस बीच, सीएसपी और उनके करीबी क्षितिज राज बारापत्रे की ओर से जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन दिया गया, लेकिन शनिवार को केस डायरी देरी से पहुंचने के कारण उस पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब सोमवार को सुनवाई हो सकती है। शुक्रवार को नेहा समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
दो दिनों तक बनाया बंधक, जमानत के नाम पर वसूली
आइजी जबलपुर द्वारा कराई गई जांच में सामने आया है कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने हत्या के आरोपित रमेश लोधी को दो दिन तक अपने शासकीय आवास में बंधक बनाकर रखा था। उसे सीएसपी की सरकारी गाड़ी में बैठाकर रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया था।
रजिस्ट्री के बाद जब रमेश ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की और पटवारी के पास नामांतरण रोकने का आवेदन दिया, तो सीएसपी ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह जेल जाने से बचना चाहता है, तो 75 लाख रुपये और देने होंगे। पैसे देने से इनकार करने पर सीएसपी ने रमेश और उसके दामाद को भी मुकदमे में शामिल कर जेल भिजवा दिया था।
सीएसपी नेहा ने रकम मिलने पर वह कोर्ट में बयान बदलवाकर उसे बरी करवा देने का वादा किया था।
ट्रांसपोर्टर के भी गंभीर आरोप, सीएम मोहन यादव ने किया सस्पेंड
जानकारी के मुताबिक, एक ट्रांसपोर्टर ने पचिसिया पर जबरन वसूली के आरोप भी लगाए थे। बाद में कुथला पुलिस थाने में पचिसिया, मारूफ अहमद और क्षितिज राज के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इन आरोपों में धोखाधड़ी और हत्या के मामले से जुड़ी आपराधिक साजिश के दावे भी शामिल हैं।
पचिसिया ने इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
FIR दर्ज होने के बाद यह मामला मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के सीधे संज्ञान में आया। सीएम ने मुख्य सचिव को कटनी सीएसपी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने और विस्तृत जांच के आदेश दिए।
शुक्रवार सुबह पुलिस की एक टीम सीएसपी ऑफिस पहुंची। उनके कमरे और स्टाफ रूम को सील कर दिया। अब अधिकारी उन दस्तावेजों और दूसरी चीजों की जांच करेंगे जिनका इस मामले से संबंध हो सकता है।

कौन हैं नेहा पचिसिया?
नेहा पचिसिया मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली हैं। पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने एयर इंडिया में एयर होस्टेस के तौर पर काम किया।
12वीं कक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने एविएशन की पढ़ाई की और एयरलाइन सेक्टर में कदम रखा। बाद में पचिसिया ने सरकारी नौकरी में जाने का फैसला किया।
उन्होंने 2012 में MPPSC परीक्षा दी और 2016 में उसका फाइनल रिजल्ट आया। उन्होंने राज्य में 20वीं रैंक हासिल की और डीएसपी के तौर पर पुलिस सेवा जॉइन की।
उनकी पहली पोस्टिंग गुना में सीएसपी के तौर पर हुई थी। बाद में उन्होंने भोपाल में पुलिस मुख्यालय में काम किया और खंडवा में भी तैनात रहीं।
मई 2025 में उनका तबादला कटनी कर दिया गया और उन्हें शहर का सीएसपी नियुक्त किया गया।
गुना में CSP के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें तीन पुलिस स्टेशनों में महिलाओं के लिए मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। इसका मकसद महिलाओं को उनके घरों के पास ही कुछ विवादों को सुलझाने की सुविधा देना था।











