JSSC-CGL रद्द: छात्रों की जीत, 1975 चयनित युवाओं के सामने भविष्य का संकट

रांची। झारखंड में 24 दिनों से चल रहे JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के आंदोलन के बाद सोमवार देर शाम सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। सरकार ने आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा वर्ष 2014 से अब तक कराई गई सभी परीक्षाओं, उनके परिणाम और चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला किया है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति गठित की गई है।

सरकार के फैसले के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत छात्रों ने जश्न मनाया। छात्र तिरंगा लेकर नाचते-गाते नजर आए। 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी अनशन समाप्त कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि JSSC-CGL रद्द करना प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल था, जिसे सरकार ने स्वीकार किया है। हालांकि, JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने फैसले का स्वागत करते हुए भी पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराई है। मुख्यमंत्री ने भी परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि सीआईडी और एसआईटी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

सरकार के फैसले का दूसरा पहलू भी सामने आया। सचिवालय के बाहर करीब 1975 ऐसे चयनित अभ्यर्थी धरने पर बैठ गए, जिन्हें JSSC-CGL के जरिए सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और अंचल निरीक्षक सह कानूनगो जैसे पदों पर नियुक्ति मिली थी। इनमें कई युवा पहले से सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं, जबकि कुछ ने पुरानी नौकरी छोड़कर नई नियुक्ति स्वीकार की थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना दोष साबित हुए उनकी नौकरी खत्म करना उचित नहीं है। कई चयनित अभ्यर्थियों ने मामले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

इस तरह सरकार का फैसला झारखंड में एक ही दिन दो अलग-अलग तस्वीरें सामने लाया—एक ओर परीक्षा रद्द होने पर आंदोलनकारी छात्रों की जीत का जश्न, तो दूसरी ओर चयनित युवाओं के भविष्य को लेकर गहरी चिंता और आक्रोश। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत विपक्षी नेताओं ने फैसले को छात्रों की जीत बताया, लेकिन सीबीआई जांच की मांग भी दोहराई। सरकार ने प्रभावित अभ्यर्थियों को कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ उन युवाओं के हितों की भी रक्षा कैसे की जाए, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल कर ली है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now