नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद (Shashi Tharoor) ने कहा है कि देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा उठाए गए कई मुद्दे कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अपने छात्रों की गूंज अभियान के माध्यम से पहले ही उठाए जा चुके थे, लेकिन उन मुद्दों को जनता से वैसा समर्थन नहीं मिला।
शशि थरूर ने मुंबई में आईआईएमयूएन की 15वीं वर्षगांठ के समारोह में कहा कि स्थापित पार्टियां तब तक अप्रासंगिक रहेंगी जब तक वे उन नई आवाजों को नहीं सुनतीं जिन्हें उन्होंने अब तक नहीं सुना है और मुझे लगता है, सच कहूं तो, हमें इस दौरान ही उन्हें सुनना शुरू कर देना चाहिए था।
दिलचस्प बात यह है कि सीजेपी और जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दे हमने पहले ही उठा लिए थे। हमने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया था जिसमें राहुल गांधी ने छात्रों को पेपर लीक और अन्य मुद्दों के बारे में संबोधित किया था और उसका कोई खास असर नहीं हुआ।
Gen Z पीढ़ी की नब्ज को समझने में नाकाम
शशि थरूर ने आगे कहा, “इसीलिए हमें खुद से यह पूछने की जरूरत है कि हम क्या करने में असफल रहे? क्या हम सुनने में असफल रहे? क्या हम जनता की नब्ज जानने के पुराने मुहावरे को अपनाने में असफल रहे? क्या हम Gen Z पीढ़ी की नब्ज को समझने में नाकाम रहे?”
लाठीचार्ज एक क्रूर और नासमझी भरी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “सोनम वांगचुक का विरोध प्रदर्शन हुआ, जिससे कुछ समर्थन और ध्यान आकर्षित हुआ। फिर जब जंतर-मंतर पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी, जो स्वीकार्य क्षमता से कहीं अधिक थी और उन्होंने संसद तक मार्च करने का फैसला किया, तब पुलिस ने, मेरी राय में, बेहद नासमझी से, सबसे क्रूर तरीके से कार्रवाई की और दुर्भाग्य से, जैसा कि आप जानते हैं, आप सभी को खबर पता है।
इसके परिणामस्वरूप पूरे देश में आक्रोश फैल गया। इसलिए मैं जंतर-मंतर गया। मैं मंच पर जाकर भाषण देने नहीं गया। मैं वहां सुनने गया था और मैंने कई युवाओं से बात की। लोगों ने मुझे देखा, वे मेरे चारों ओर जमा हो गए, उन्होंने मुझे अपनी कहानियां, अपने अनुभव बताने शुरू कर दिए।”
राजनीति के पुराने तरीके नहीं करेंगे काम
कांग्रेस सांसद ने भारत की युवा आबादी के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि दक्षिण एशिया की राजनीतिक पार्टियां अब यह नहीं मान सकतीं कि राजनीति के पुराने तरीके ही काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “2029 में ‘जेन जी’ (Gen Z) सबसे बड़ा वोटिंग ग्रुप होगा। उपमहाद्वीप के ज्यादातर हिस्सों को जागना होगा और इस बात को समझना होगा कि युवा बदलाव चाहते हैं।
अब सब कुछ पहले जैसा नहीं चल सकता।”थरूर ने विपक्ष की राजनीति कैसे होनी चाहिए, इस पर अपनी पुरानी बात फिर से दोहराई। उन्होंने कहा, “मैं अपनी पार्टी में यही बात कहता रहा हूं, सड़क का काम सड़क पर और सदन का काम सदन में होना चाहिए।”
मैं बेवफा नहीं हूं बोले थरूर
थरूर ने अपनी पार्टी के नेतृत्व से भिन्न राय व्यक्त करने की अपनी इच्छा का भी बचाव किया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी पार्टी के प्रति बेवफा नहीं हूं, लेकिन मैं अपने स्वतंत्र विचार व्यक्त करता हूं। कभी-कभी मेरे विचारों का इस्तेमाल मेरे विरोधी कर सकते हैं। कांग्रेस सबसे कम अलोकतांत्रिक पार्टी है। क्या आपने बीजेपी में किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सुना है जिसने असहमति व्यक्त की हो और पार्टी में बना रहा हो? मैं उस पार्टी में हूं जो मेरे विचारों के सबसे करीब है।”










