लेंस डेस्क । META के सीईओ Mark Zuckerberg ने भारत सरकार से चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों पर माफी मांगी है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से दी है। आज ही संसदीय समिति ने मेटा से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा था। समिति ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो मेटा को भारत में मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और कुछ छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
आईटी मंत्रालय से चल रही बैठक
इसी मामले में आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच दो दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था। मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कापलान की अगुआई में उच्च स्तरीय टीम ने आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की।
पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर नाराजगी
सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी। वीडियो कुछ समय के लिए हटा दिया गया था, बाद में मेटा ने इसे फिर से डाल दिया।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने मेटा को साफ कहा कि वह सिर्फ ‘इंटरमीडियरी’ की परिभाषा में नहीं आता, क्योंकि कंपनी तय करती है कि कौन-सा कंटेंट किस तक पहुंचेगा। ऐसे में आईटी एक्ट के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण मेटा पर लागू नहीं होगा।
मेटा ने इस पूरे मामले में अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद जताया और माफी मांगी। सरकार ने कहा कि भारत के कानून का हर हाल में पालन करना होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग और आपत्तिजनक कंटेंट पर भी चिंता जताई गई। मेटा ने जवाब दिया कि उसके यहां सख्त आंतरिक नियम लागू हैं और प्लेटफॉर्म का जानबूझकर दुरुपयोग किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है।








