संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का बहिष्कार

नई दिल्ली। विपक्ष के सांसदों ने आज (Parliament Monsoon Session) से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से प्रतीकात्मक विरोध में वॉकआउट कर दिया।ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 विद्रोही सांसदों ने जून में नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया था। तृणमूल की कीमत पर एनसीपीआई के इस अचानक उभार को विपक्ष ने स्वीकार नहीं किया।

विपक्ष ने पूछा कि एनसीपीआई को अखिल दलीय बैठक में कैसे शामिल किया जा सकता है, जबकि उनका विलय अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। तृणमूल सांसद सौगत राय ने कहा कि हमारी चिंता यह है कि एक अपरिचित पार्टी, जिसका नाम संसद की वेबसाइट पर भी नहीं है, को बैठक में बुलाया गया है।संसद की वेबसाइट पर अभी भी उन 20 विद्रोही सांसदों को तृणमूल के सदस्य के रूप में ही दिखाया जा रहा है।

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी ने कहा, “सभी विपक्षी दलों ने अखिल दलीय बैठक से कुछ मिनट के लिए वॉकआउट किया। यह मोदी सरकार के उस फैसले के खिलाफ विरोध था जिसमें 20 ‘विद्रोही’ टीएमसी सांसदों के पार्किंग प्लेस वाली एनसीपीआई को निमंत्रण दिया गया, जबकि स्पीकर के पास अंतिम फैसला अभी लंबित है।”

राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने वॉकआउट को एनसीपीआई को बैठक में आमंत्रित किए जाने के खिलाफ प्रतीकात्मक बहिष्कार बताया।उन्होंने कहा, “हमारा सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर दान घोटाला है। हमने आठ-नौ मुद्दे उठाए हैं। इनमें नीट पेपर लीक, कृषि और पेट्रोल में E20 ब्लेंड शामिल हैं। हम सीमांकन का विरोध करेंगे।

एनसीपीआई ब्लॉक की नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली अखिल दलीय बैठक में शामिल होने के लिए संसदीय कार्य मंत्री का धन्यवाद दिया। एक सवाल पर कि उनका एनसीपीआई के साथ विलय कब स्वीकृत होगा, उन्होंने कहा, “ऐसा फैसला होने में समय लगता है। हम स्पीकर को सभी जरूरी दस्तावेज सौंपेंगे।” उन्होंने तृणमूल से दूर अपनी गुट को सीट आवंटित किए जाने को सरकार की सकारात्मक पहल बताया।

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