Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे (Nakti) गांव में हुई बेदखली की कार्रवाई ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। भारी बारिश के बीच घरों को तोड़े जाने से नाराज ग्रामीण अब सीधे न्याय की गुहार लगाने प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख के पास जा रहे हैं। राज्यपाल से मुलाकात का समय न मिलने के बाद, ग्रामीणों ने 15 जुलाई को नकटी गांव से राजभवन तक पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी ग्रामीणों के इस पैदल मार्च में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी, जिससे प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
राज्यपाल के नाम सौंपेंगे ज्ञापन: ग्रामीणों ने क्यों लिया पदयात्रा का फैसला?
दरअसल, रायपुर एयरपोर्ट के पास स्थित नकटी गांव में हाल ही में प्रशासन द्वारा तोड़फोड़ और बेदखली की बड़ी कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई के बाद से ही पीड़ित ग्रामीण लगातार राज्यपाल से मुलाकात का समय मांग रहे थे ताकि वे अपनी आपबीती सुना सकें।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें राजभवन से मुलाकात का समय नहीं दिया गया। लगातार अनदेखी से परेशान होकर अब ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 15 जुलाई को निकलने वाली इस पदयात्रा के जरिए ग्रामीण राजभवन पहुंचेंगे और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपेंगे।
पदयात्रा के दौरान गाँव के लोगों ने तेलीबांधा से पहले VIP रोड में रुक कर खाना खाया और फिर यहां से पद यात्रा आगे बढ़ रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यदि उन्हें मौका मिला, तो वे राज्यपाल के सामने सीधे अपनी पीड़ा रखेंगे और इस मामले में उनके हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
“भारी बारिश के बीच जिस तरह हमें बेघर किया गया, वह हमारे साथ बहुत बड़ा अन्याय है। हम चाहते हैं कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख (राज्यपाल) इस मामले में खुद हस्तक्षेप करें और हमें न्याय दिलाएं।”
— पीड़ित ग्रामीण, नकटी गांव (रायपुर)
नकटी गांव के लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर सबसे ज्यादा है कि प्रशासन ने कार्रवाई के लिए मानसून (भारी बारिश) का समय चुना। तेज बरसात के बीच छोटे बच्चों और परिवारों को बेघर कर दिया गया, जिससे उनके सामने रहने और खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के इस दर्द को भांपते हुए अब कांग्रेस पार्टी ने भी इस आंदोलन में एंट्री ले ली है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे जनता के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और नकटी गांव से लेकर राजभवन तक की इस पदयात्रा में ग्रामीणों का पूरा साथ देंगे। इस राजनीतिक समर्थन के बाद प्रशासन और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है।
अब देखना यह होगा कि 15 जुलाई को होने वाले इस राजभवन मार्च को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन क्या कदम उठाता है, और क्या राज्यपाल पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें कोई ठोस आश्वासन देते हैं।










