ईसाई धर्म के प्रचार के लिए अब अमेरिकी बैंक के ATM कार्ड के जरिए भारत में फंडिंग… भारत भेजे गए 95 करोड़, छत्तीसगढ़ में भी साढ़े 6 करोड़ पहुंचे

Truist Bank

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी डेबिट कार्ड्स के जरिए भारत में फंडिंग के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत चल रही जांच में सामने आई है, जिसमें अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक (Truist Bank) से जुड़े डेबिट कार्ड्स के जरिए नियामकीय प्रक्रियाओं को बायपास करने का आरोप है।

यह जांच ‘द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI)’ नामक संगठन और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियों से संबंधित है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस फंडिंग का इस्तेमाल भारत में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका है।

ED ने 18 और 19 अप्रैल को देश के अलग-अलग राज्यों में छह ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाए। जांच में पाया गया कि विदेशी बैंक डेबिट कार्ड्स भारत लाकर विभिन्न एटीएम से बार-बार नकदी निकाली गई और इस रकम का उपयोग TTI की गतिविधियों में किया गया। संगठन विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है, जिससे नियमों के उल्लंघन का शक गहरा गया है।

जांच में हुए कई अहम खुलासे हुए हैं। इसमें नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी डेबिट कार्ड्स के जरिए करीब 95 करोड़ रुपये भारत में लाए गए। नक्सल प्रभावित इलाकों खासकर धमतरी और बस्तर में करीब 6.5 करोड़ रुपये निकाले गए। इन पैसों के इस्तेमाल को लेकर जांच जारी है, जिसमें धर्म प्रचार-प्रसार से जुड़े एंगल की भी पड़ताल हो रही है।

ED के लुकआउट सर्कुलर के आधार पर मिकाह मार्क नामक विदेशी नागरिक को बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ब्यूरो ने रोका। उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड्स बरामद हुए। छापेमारी में 25 विदेशी डेबिट कार्ड्स, 40 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए।

ED के अनुसार, नकदी निकासी की पूरी प्रक्रिया को प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह की फंडिंग से ‘पैरेलल कैश इकोनॉमी’ के उभरने का खतरा बताया गया है, जिससे सुरक्षा स्थिति प्रभावित हो सकती है।

यह मामला TTI द्वारा भारत में विदेशी फंडिंग के नियमों का पालन न करने और संभावित दुरुपयोग से जुड़ा है। ED ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है और आगे और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के संवेदनशील इलाकों में इस तरह की फंडिंग का इस्तेमाल खासतौर पर धार्मिक गतिविधियों के संदर्भ में सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 13 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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