नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत केंद्र सरकार पर राज्यों की देनदारी 9,300 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 9 फरवरी 2026 तक कुल बकाया 9,308.67 करोड़ रुपये था। यह जानकारी राज्यसभा में लिखित जवाब में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने दी है।
मनरेगा का नाम बदलकर अब केंद्र सरकार ने गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB G RAM G कर दिया है।
राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा बकाया उत्तर प्रदेश में है, जहां यह राशि 1,158.71 करोड़ रुपये तक पहुंची। इसके बाद आंध्र प्रदेश (1,014.60 करोड़), कर्नाटक (746.65 करोड़), तमिलनाडु (729.88 करोड़), मध्य प्रदेश (704.64 करोड़), बिहार (664.72 करोड़), महाराष्ट्र (528.28 करोड़) और असम (482.51 करोड़) का नंबर आता है। अन्य प्रमुख राज्यों में केरल (419.09 करोड़), ओडिशा (411.64 करोड़), झारखंड (385.02 करोड़) और राजस्थान (383.24 करोड़) में भी काफी बकाया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि मनरेगा एक मांग-आधारित योजना है, जिसमें मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए किया जाता है। केंद्र सरकार रोजाना पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से मजदूरी के लिए मंजूरी जारी करती है, जो राज्यों से मिले फंड ट्रांसफर ऑर्डर पर आधारित होती है।
पिछले वित्त वर्षों (2024-25 तक) के सभी स्वीकृत और वैध बकाया मजदूरी भुगतान पहले ही साफ कर दिए गए हैं (पश्चिम बंगाल को छोड़कर)। सामग्री और प्रशासनिक खर्चों के लिए राज्य सरकारों को प्रस्ताव भेजने पड़ते हैं, जिसके आधार पर केंद्र समय-समय पर किस्तों में फंड जारी करता है। यह प्रक्रिया श्रम बजट, काम की मांग, फंड के उपयोग और जरूरी दस्तावेजों पर निर्भर करती है।
वर्तमान वित्त वर्ष में 8 फरवरी 2026 तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कुल 78,004.59 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिसमें मजदूरी के लिए 64,789.49 करोड़ और सामग्री व प्रशासनिक मद में 13,215.10 करोड़ रुपये शामिल हैं।









