अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनुपपुर जिले के कोतमा क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाओं के बीच स्थानीय युवाओं का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। बड़ी संख्या में युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर SDM कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा। युवाओं ने केवई नदी (Kewai River) पर बन रहे एनीकेट, प्रस्तावित बैराजों और उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि कोतमा के आसपास कई पावर प्लांट और औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गई हैं, लेकिन इस तथाकथित औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय युवाओं को नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि कंपनियां बाहर के लोगों को रोजगार दे रही हैं, जबकि स्थानीय शिक्षित और कुशल युवा बेरोजगार होकर पलायन करने को मजबूर हैं।

युवाओं और किसानों ने केवई नदी पर बन रहे एनीकेट और प्रस्तावित 9 बैराजों को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने पर्यावरण स्वीकृति (EC) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर नियमों का उल्लंघन किया है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार कंपनी की पुरानी पर्यावरण स्वीकृति 26 नवंबर 2022 को समाप्त हो चुकी थी, जबकि नई स्वीकृति 11 सितंबर 2025 को मिली। इसके बावजूद 31 जुलाई 2025 को जल संसाधन विभाग और कंपनी के बीच अनुबंध किया गया, जिसे युवाओं ने अवैध करार दिया है।
युवाओं का कहना है कि पर्यावरण स्वीकृति की शर्तों के तहत नदी और पावर प्लांट के बीच बफर जोन और ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाना अनिवार्य है, लेकिन इसके विपरीत नदी के बीचों-बीच कंक्रीट का एनीकेट बनाया जा रहा है। साथ ही कंपनी पर पर्यावरण मंत्रालय को दिए आवेदन में 9 बैराजों की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगाया गया है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना के समय स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ। कंपनियां बाहरी लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसके कारण स्थानीय युवा रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। साथ ही कंपनियों के CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है।
प्रदर्शन के दौरान SDM पी. नाग कार्यालय में मौजूद नहीं थे। उनकी जगह रीडर महेंद्र गुप्ता ने युवाओं से ज्ञापन लिया। उन्होंने बताया कि युवाओं की मांगों को अनूपपुर थर्मल पावर प्रबंधन तक पहुंचाया जाएगा और 13 मार्च को कंपनी के अधिकारियों और युवाओं के बीच बैठक कराई जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले 17 फरवरी को भी स्थानीय युवाओं ने इसी मुद्दे को लेकर SDM को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
क्यों सुलग रहा है विरोध?
कोतमा क्षेत्र में कोयला खदानों और बिजली संयंत्रों के विस्तार के साथ विकास के बड़े दावे किए गए थे। लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। उनका आरोप है कि उद्योगों द्वारा नदियों के जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे जल स्तर गिर रहा है।
साथ ही फैक्ट्रियों और पावर प्लांटों से निकलने वाले धुएं और मलबे से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।











