रायपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन (AIRWO) की छत्तीसगढ़ इकाई ने रायपुर के शहीद अनुसुइया बाई सभागार, YMCA प्रोग्राम सेंटर में एक महत्वपूर्ण कन्वेंशन का आयोजन किया। विषय था ‘मनुवादी पूंजीवादी पितृसत्ता और महिला आंदोलन की चुनौती’।
कन्वेंशन की मुख्य वक्ता AIRWO की महासचिव एम. सेल्वी ने कहा कि ‘क्रूर मनुस्मृति आधारित हिंदुराष्ट्र और उसकी सहयोगी कॉरपोरेट पूंजीवादी फासीवादी पितृसत्ता को उखाड़ फेंके बिना भारतीय महिलाओं की मुक्ति संभव नहीं है।’ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि 8 मार्च 1910 में क्लारा जेटकिन की पहल पर कोपेनहेगन में हुए दूसरे अंतरराष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन ने इसे स्थापित किया था। उन्होंने रूस की मेहनतकश महिलाओं के 8 मार्च 1917 के विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया, जहां महिलाओं ने “रोटी और शांति” की मांग की थी।
सेल्वी ने चिंता जताई कि आज दुनिया भर में नव-फासीवादी, पितृसत्तात्मक और कट्टरपंथी ताकतें आक्रामक हो रही हैं। भारत में RSS के नेतृत्व वाली ताकतें मनुस्मृति आधारित हिंदुराष्ट्र की परियोजना को लागू करने में जुटी हैं, जो महिलाओं के साथ-साथ दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला है।अन्य वक्ताओं की मुख्य बातें बौद्ध प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ की संस्थापक सविता बौद्ध संकल्पी ने कहा कि मनुस्मृति भारत के संविधान को नकारती है और महिलाओं को मानव का दर्जा नहीं देती।
महिलाओं को डॉ. अम्बेडकर के विचारों से लैस होकर ब्राह्मणवादी हिंदुत्व पितृसत्ता के खिलाफ लड़ना होगा। AIRWO उत्तर प्रदेश संयोजक कॉमरेड अंजू ने कहा कि तथाकथित हिंदुराष्ट्र में महिलाओं को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित किया जाएगा, क्योंकि यह अडानी-अंबानी जैसे कॉरपोरेट घरानों की लूट को मजबूत करेगा। ओडिशा संयोजक प्रमिला ने कहा कि मनुवादी पितृसत्ता और पूंजीवाद के शोषण से मुक्ति की लड़ाई जारी है। AIRWO समान विचार वाली संगठनों के साथ कॉरपोरेट-भगवा गठबंधन के खिलाफ प्रतिरोध लड़ रही है।
समाजसेवी सुरेखा जांगड़े ने पूछा, ‘महिलाओं के लिए सिर्फ एक दिन क्यों? महिलाएं आधा आकाश हैं और साल भर पूंजीवाद-पितृसत्ता से लड़ना पड़ता है।’
जमात-ए-इस्लामी हिंद की फाखरा तबस्सुम और नुजहत आबिदा ने महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के खिलाफ नफरत फैलाने वाली हिंसक साम्प्रदायिक मुहिम पर गहरी चिंता जताई।










