छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन Vishwaranjan का निधन हो गया है। उन्होंने 7 मार्च 2026 को शनिवार की रात पटना के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे काफी समय से हृदय रोग से जूझ रहे थे। पिछले महीने उनकी तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें पटना में भर्ती कराया गया था। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज किया, लेकिन हालत सुधरने की बजाय और खराब हो गई और अस्पताल में ही उनका निधन हो गया।
विश्वरंजन 1973 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। उनका जन्म 1 अप्रैल 1952 को बिहार के गया में हुआ था। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। मध्य प्रदेश के बंटवारे के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला, लेकिन 2007 से पहले वे यहां तैनात नहीं थे। वे छत्तीसगढ़ के छठे डीजीपी बने। वर्ष 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने लगभग चार साल (2007 से 2011 तक) राज्य पुलिस की कमान संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने पुलिस विभाग में कई अहम बदलाव किए।
उनके कार्यकाल में ही नक्सलवाद के खिलाफ ऑपरेशन ग्रीन हंट जैसे अभियान चले जिनकी देश दुनिया में तीखी आलोचना हुई थी। विश्वरंजन छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद के खिलाफ केवल मैदानी जंग का ही नहीं बल्कि वैचारिक लड़ाई का भी नेतृत्व करते रहे। वे एक संवेदनशील रचनाकार थे। उनके अनेक कविता संग्रह तथा अन्य रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। विश्वरंजन अपने मातहतों के बीच भिन्न पुलिसिंग के लिए जाने जाते थे।
छत्तीसगढ़ में ही उनके तत्कालीन गृहमंत्री से मतभेद हो गए थे और कहा जाता है कि इसके बाद ही तत्कालीन रमन सरकार ने उन्हें पुलिस महानिदेशक पद से हटा दिया था। सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने गृहप्रदेश बिहार चले गए थे जहां पटना में शनिवार को उन्होंने अंतिम सांसें लीं।
विश्वरंजन जी के पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान, 401 कश्यप नीलाव अपार्टमेंट, किदवाइपुरी में अंतिम दर्शन के लिए सुबह 11:30 बजे से रखा जायेगा। अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा आज दोपहर लगभग 3:30 बजे बांस घाट के लिए रवाना होगी।










