रायपुर। छत्तीसगढ़ में मूलनिवासी संघ (Mulnivasi Sangh) ने 17 फरवरी को राज्य स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन में यूजीसी के नए कानून (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026) को लागू करने और जाति आधारित जनगणना को मजबूती से लागू करने की मांग मुख्य रूप से उठाई गई। साथ ही बैकलॉग पदों को भरने और फासीवादी ताकतों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हो रही प्रताड़ना के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।
प्रदर्शन दुर्ग के हिंदी भवन और कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने जुलूस और आम सभा के रूप में हुआ। इसमें दुर्ग और रायपुर जिले के कई मूलनिवासी, अल्पसंख्यक और वामपंथी संगठनों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत जुलूस से हुई, जिसके बाद सभा में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि भाकपा माले (रेड स्टार) के राज्य सचिव सौरा थे। संचालन मूलनिवासी संघ छत्तीसगढ़ के सुभाष मेश्राम ने किया।
वक्ताओं में शामिल थे. प्रख्यात बुद्धिजीवी रेशमा आनंद, तुहिन (अखिल भारतीय संयोजक, जाति उन्मूलन आंदोलन – CAM और क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच – RCF), राष्ट्रीय बौद्ध महासभा छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष दशरथ अहिरवार, बुद्धिस्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ संयोजक सविता बौद्ध संकल्पी, जयश्री बौद्ध मातृ शक्ति संगठन संयोजक चंद्रकला तराम, सतनामी समाज के अध्यक्ष बी.एल. कुर्रे, पास्टर राकेश कुमार, सविता मेश्राम, के.के. वर्मा, रवि गाडगे, भागवत साहू, विनोद वासनिक, राजेंद्र परगनिहा और श्री ठाकुर।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि सर्वोच्च न्यायालय SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के जरिए लाखों मतदाताओं के नागरिक और मताधिकार छीनने पर चुप्पी साधे रहता है लेकिन यूजीसी कानून लागू करने से समाज बंटने की बात क्यों की जाती है? सभा में वक्ताओं ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका समेत संवैधानिक संस्थाओं का फासीवादीकरण हो चुका है। ज्यादातर फैसले दलित, उत्पीड़ित, आदिवासी, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और गरीब मेहनतकश लोगों के खिलाफ होते हैं। ये फैसले कॉरपोरेट घरानों के हित में लिए जाते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए भारतीय संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की शपथ ली। उन्होंने आरएसएस और मनुवादी ताकतों द्वारा बहुजन मूलनिवासियों पर जातिव्यवस्था आधारित हिंदुराष्ट्र और मनुस्मृति थोपने के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।
अंत में, मूलनिवासी संघ छत्तीसगढ़ की ओर से भारत के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला अधिकारियों को सौंपा गया। आभार मूलनिवासी संघ दुर्ग के अध्यक्ष जय साहू ने व्यक्त किया। प्रदर्शन में एकजुट होकर सभी प्रगतिशील, लोकतांत्रिक ताकतों, दलित-उत्पीड़ित, आदिवासी, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को साथ मिलकर समतावादी समाज बनाने के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।







