कहां थे, कहां पहुंच गए 25 सालों में? PM Modi ने खुद बताया

25 Years of PM Modi

नई दिल्‍ली। सत्ता में पद पर बने रहते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज 25 साल पूरे गए। मंगलवार को उन्‍होंने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की। 7 अक्टूबर 2001 को ही उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी।

मोदी ने बताया कि 2013 में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुना गया था। उस समय देश भ्रष्टाचार, नीतिगत ठहराव और विश्वास की कमी जैसे संकटों से जूझ रहा था। उन्होंने कहा, “यूपीए सरकार उस दौर में भ्रष्टाचार और पक्षपात का प्रतीक बन गई थी। भारत को वैश्विक स्तर पर कमजोर माना जा रहा था। लेकिन जनता ने हमारे गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया, जो तीन दशकों में पहली बार किसी पार्टी को मिला।”

प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर कई पोस्ट के जरिए अपने अब तक के कार्यकाल, चुनौतियों और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब राज्य भूकंप, चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से घिरा हुआ था। उन्होंने लिखा, “मेरी पार्टी ने उस कठिन समय में मुझ पर भरोसा दिखाया। इन संकटों ने मेरी जनसेवा की भावना को और दृढ़ किया।”

उन्होंने आगे कहा, “गुजरात सूखे से प्रभावित था, फिर भी हमने इसे कृषि में अग्रणी बनाया। व्यापारिक संस्कृति को औद्योगिक और विनिर्माण ताकत में बदला। सामाजिक और भौतिक ढांचे को मजबूत किया गया।”

मोदी ने अपनी मां के शब्दों को याद करते हुए लिखा, “जब मैंने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब मेरी मां ने मुझसे कहा था कि गरीबों की सेवा करो और कभी रिश्वत मत लेना। मैंने भी जनता से वचन दिया था कि मेरा हर कार्य सद्भावना और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा के लिए होगा।”

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में देश में हुए बड़े बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने महिलाओं, युवाओं और किसानों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक चमकता सितारा है। हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं हैं।” साथ ही, उन्होंने ‘गर्व से कहो, ये स्वदेशी है’ के नारे के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया।

अंत में, प्रधानमंत्री ने कहा, “देश की सेवा मेरे लिए सबसे बड़ा गौरव है। यह दायित्व मुझे कृतज्ञता और उद्देश्य की भावना से भर देता है। संविधान के मूल्यों को अपनाते हुए मैं ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए और अधिक मेहनत करूंगा।”

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