Twisha Sharma Case : भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई 2026 की रात 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव फांसी के हालत में मिला। शादी को महज पांच महीने हुए थे। पूर्व मिस पुणे, MBA ग्रेजुएट, मार्केटिंग प्रोफेशनल और मॉडल रही ट्विशा की मौत अब पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, लिगेचर रिपोर्ट और पुलिस की लापरवाही के आरोपों ने इस केस को और जटिल बना दिया है। परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है, जबकि पुलिस आत्महत्या की ओर इशारा कर रही है।
घटना का timeline
दिसंबर 2025: ट्विशा और समर्थ सिंह (भोपाल के वकील) की शादी। दोनों की मुलाकात 2024 में एक डेटिंग ऐप पर हुई थी।
12 मई 2026: रात में ट्विशा का शव घर में फांसी पर लटका मिला।
13-15 मई: पोस्टमॉर्टम AIIMS भोपाल में हुआ। परिवार ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई।
मई के तीसरे सप्ताह: SIT जांच शुरू, पति समर्थ सिंह फरार, अग्रिम जमानत खारिज।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
AIIMS भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार: मौत का कारण Antemortem hanging by ligature (जीते जी फांसी लगने से दम घुटना)।
गले पर दो पैरेलल लिगेचर मार्क्स (फंदे के निशान)।
शरीर के अन्य हिस्सों पर एकाधिक एंटीमॉर्टम इंजरी (मौत से पहले की blunt force injuries मारपीट के संकेत)।
ब्लड और विसरा टेस्ट में नशे के कोई सबूत नहीं मिले।
नाखूनों के क्लिपिंग्स DNA विश्लेषण के लिए सुरक्षित रखे गए।
सबसे बड़ी कमी: पोस्टमॉर्टम के दौरान फंदे में इस्तेमाल हुई नायलॉन बेल्ट (जिम्नास्टिक या जिम बेल्ट) डॉक्टरों को उपलब्ध नहीं कराई गई।
लिगेचर रिपोर्ट: आत्महत्या की पुष्टि, लेकिन सवाल बरकरार
बाद में पुलिस ने बेल्ट फॉरेंसिक टीम को सौंपी। लिगेचर रिपोर्ट में गले के निशानों और बेल्ट की बनावट, चौड़ाई तथा दबाव का मिलान पाया गया। इससे पुलिस का दावा है कि ट्विशा ने उसी बेल्ट से आत्महत्या की।फिर भी क्यों उठ रहे सवाल?
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लिगेचर मटेरियल सबसे महत्वपूर्ण सबूत होता है। इससे पता चलता है कि फंदा खुद लगाया गया था या शव को बाद में लटकाया गया।
निशानों का अंग, दबाव और बनावट मैच करते हैं या नहीं।
पोस्टमॉर्टम के समय बेल्ट न होने से डॉक्टरों ने लिखा “scientific correlation between the ligature mark and the alleged material could not be established”। यह पुलिस की गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। SIT चीफ एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने स्वीकार किया कि बेल्ट क्राइम सीन से जब्त तो हुई, लेकिन पोस्टमॉर्टम में पेश नहीं की गई। अब इस लापरवाही की भी जांच हो रही है।
परिवार के आरोप
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा, भाई मेजर हर्षित शर्मा और अन्य परिजनों का कहना है कि दहेज की मांग, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल है। जबरन गर्भपात का दबाव बनाया गया।
ट्विशा के व्हाट्सएप और मैसेजेस: “I am trapped”, “मेरा दम घुट रहा है”, “Bro tu mat” जैसे आखिरी संदेश कई सारे सवाल खड़े कर रहा है।
घटना की रात पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी गई, शरीर हटाया गया।
प्रभावशाली ससुराल इस मामले को और पेचीदा बना रहा है। सास — रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह) के कारण स्थानीय जांच पर भरोसा नहीं है ऐसे परिवार के आरोप हैं।
परिवार ने अंतिम संस्कार टाल दिया है और दिल्ली AIIMS में दूसरा पोस्टमॉर्टम, CBI जांच तथा राष्ट्रपति भवन तक गुहार लगाई है।
ससुराल पक्ष का दावा
सास गिरिबाला सिंह ने कहा कि ट्विशा मानसिक समस्याओं, मूड स्विंग्स और संभवतः ड्रग्स से जूझ रही थीं। पुलिस ने ड्रग एडिक्शन के दावे को खारिज किया — पोस्टमॉर्टम में कोई सबूत नहीं मिला।जांच की स्थिति6 सदस्यीय SIT जांच कर रही है।
समर्थ सिंह फरार — लुकआउट नोटिस, पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया, इनाम घोषित।
गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
कोर्ट ने मौत को “अननैचुरल सर्कमस्टैंस” माना है।
ट्विशा एक शिक्षित, स्वतंत्र और आधुनिक महिला थीं। एक तरफ रसूखदार परिवार (पूर्व जज और वकील), दूसरी तरफ न्याय के लिए दर-दर भटकता छोटा परिवार। यह मामला दहेज, घरेलू हिंसा, पुलिस प्रक्रिया में लापरवाही, सबूतों की सुरक्षा और प्रभावशाली लोगों के सामने सिस्टम की कमजोरी को उजागर कर रहा है।










