सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने CGPSC 2021 परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग देने के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है और राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप और अतिरिक्त महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि CGPSC घोटाले की CBI जांच चल रही है, इसलिए जांच पूरी होने तक सभी नियुक्तियां रोक दी जानी चाहिए।
चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल और अभ्युदय सिंह ने कोर्ट को बताया कि CBI ने अपनी अंतिम चार्जशीट पहले ही दाखिल कर दी है, जिसमें कुल 171 चयनित उम्मीदवारों में से केवल 5 के नाम शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से ही 125 अभ्यर्थियों को जॉइनिंग दे दी गई है। शेष उम्मीदवारों को तीन साल से अधिक समय से जॉइनिंग से वंचित रखना उचित नहीं है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के तर्कों को स्वीकार नहीं किया और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और बाद में डिवीजन बेंच ने भी सरकार की अपील खारिज कर दी थी।
CGPSC 2021 घोटाला क्या था?
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने वर्ष 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई थी, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी पास हुए। मुख्य परीक्षा मई 2022 में हुई और इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी। आरोप लगा था कि परीक्षा और इंटरव्यू में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयनित किया गया, जबकि योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी।
CBI ने जांच के दौरान कई छापे में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। अब तक कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवनलाल ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और कुछ चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शेष बचे चयनित उम्मीदवारों को भी जल्द ही जॉइनिंग मिलने की संभावना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि CBI जांच के परिणाम के अधीन रहते हुए ही नियुक्तियां दी जा सकती हैं, लेकिन जांच के नाम पर अभ्यर्थियों को अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।यह फैसला छत्तीसगढ़ में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









