नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ भाजपा नेता और रायपुर से लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल (Brijmohan Agrawal) ने लोकसभा में देशभर के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में असंतुलन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ सहित वनांचल और आकांक्षी जिलों में चल रहे ‘एकल शिक्षक’ स्कूलों को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार से स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की।
सांसद अग्रवाल ने सदन में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से कहा कि देश के कई राज्यों में प्राथमिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जो बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है और यह शिक्षा का अधिकार कानून के मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर आधुनिक भवन और सुविधाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
सांसद ने प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (PM-SHRI) योजना के तहत विकसित हो रहे स्कूलों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल भवन और आधारभूत ढांचा तैयार कर देने से शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी। इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति भी उतनी ही आवश्यक है।
सदन में इस सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती मुख्य रूप से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति और नामांकन में वृद्धि के कारण शिक्षकों की रिक्तियां लगातार बनती रहती हैं, जिन्हें भरना राज्यों की जिम्मेदारी है।
मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार समग्र शिक्षा योजना के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। पहाड़ी, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों, विशेषकर महिला शिक्षकों के लिए आवासीय क्वार्टर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता और टिकाव बेहतर हो सके।
सरकार के अनुसार पीएम-श्री स्कूलों में शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रति शिक्षक 2,500 रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जबकि DIET संस्थानों के माध्यम से तीन लाख रुपये तक का बजट प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए आवंटित किया गया है। इसके अलावा निष्ठा (NISHTHA) कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 के यूडाइज प्लस (UDISE+) डेटा के अनुसार देश में एकल शिक्षक स्कूलों की राज्यवार सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध है और केंद्र सरकार लगातार राज्यों को आरटीई मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दे रही है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आकांक्षी जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए राज्यों की निगरानी और सख्त की जाए।
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