नई दिल्ली।भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का को स्पॉन्सर बनकर समर्थन किया है जिसमें ईरान (Iran) के द्वारा मिडिल ईस्ट के देशों के खिलाफ उसके हमलों को लेकर निंदा की गई है।
इस प्रस्ताव में ईरान के कई खाड़ी देशों और जॉर्डन पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की निंदा की गई है और तेहरान से तत्काल आगे के हमलों तथा अस्थिर करने वाली गतिविधियों को रोकने की मांग करता है।
15 सदस्यीय परिषद ने बुधवार, 11 मार्च 2026 को प्रस्ताव संख्या 2817 को 13 मतों से पारित किया, जिसमें चीन और रूस ने मतदान से परहेज किया। कोई भी सदस्य इसके खिलाफ नहीं था।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष शुरू हुए दो सप्ताह हो गए हैं और इसमें लगभग दर्जन भर देश शामिल हो चुके हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, परिषद ने ईरान के बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के खिलाफ हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इसमें विशेष रूप से आवासीय क्षेत्रों और नागरिक स्थानों पर हमलों की निंदा की गई है और इनकी तत्काल समाप्ति की मांग की गई है।
प्रस्ताव में तेहरान से समुद्री व्यापार में हस्तक्षेप करने वाली धमकियों, उकसावे और कार्रवाइयों को रोकने तथा प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करने की भी मांग की गई है।
बहरीन के प्रतिनिधि ने प्रस्ताव के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा, संदेश स्पष्ट है और ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन ईरानी अन्यायपूर्ण, शत्रुतापूर्ण कृत्यों को अस्वीकार करने में दृढ़ है।’
संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि ने कहा कि ईरान हर दिशा में गोलीबारी कर रहा है। रिकॉर्ड संख्या में भारत सहित लगभग 140 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है।
डेनमार्क के प्रतिनिधि ने कहा कि इस ‘महत्वपूर्ण क्षण’ में मिडिल ईस्ट की आवाजों को सुनना अनिवार्य है।
फ्रांस के प्रतिनिधि ने तेहरान पर भारी जिम्मेदारी डालते हुए कहा, ईरान वर्तमान वृद्धि के लिए भारी जिम्मेदार है।
लाइबेरिया के प्रतिनिधि जो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और सोमालिया की ओर से बोल रहे थे ने कहा कि उनका मत कूटनीति, संवाद, तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है।
चीन ने परहेज करते हुए चेतावनी दी कि प्रस्ताव संघर्ष के मूल कारण और समग्र चित्र को संतुलित रूप से नहीं दर्शाता। रूस के प्रतिनिधि ने इसे पक्षपाती और एकतरफा बताया और कहा कि बिना संदर्भ के पढ़ने पर लगता है कि तेहरान शुद्ध दुर्भावना से हमले कर रहा है।
पहले मतदान के बाद, रूस द्वारा पेश किया गया दूसरा प्रस्ताव जिसमें किसी पक्ष का नाम लिए बिना तनाव कम करने की मांग थी) असफल रहा, जिसमें केवल चार मत पक्ष में आए।
यूनाइटेड किंगडम के प्रतिनिधि ने रूसी कदम की आलोचना करते हुए कहा कि रूस को यहां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संरक्षक बताना असंभव है।
लातविया के प्रतिनिधि ने इसे गहरा व्यंग्यात्मक बताया।
तेहरान के प्रतिनिधि ने परिषद को संबोधित करते हुए प्रस्ताव को अपने देश के खिलाफ स्पष्ट अन्याय और परिषद की विश्वसनीयता के लिए गंभीर झटका कहा।
वहीं, इज़राइल के प्रतिनिधि ने इसका स्वागत किया और कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना गलत है, शहरों को निशाना बनाना गलत है, और ईरान को रोकना होगा।











