प्रेस की आजादी के लिए खतरनाक सूची में अदानी ग्रुप और ओपइंडिया, RSF ने जारी की वैश्‍विक लिस्‍ट

December 1, 2025 6:39 PM
RSF list 2025

लेंस डेस्‍क। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने 2025 की अपनी “प्रेस फ्रीडम प्रीडेटर्स” लिस्ट प्रकाशित की है। इसमें दुनिया भर के 34 ऐसे नेता, सरकारें, संगठन और ताकतवर हस्तियां शामिल हैं, जिन पर पत्रकारों के खिलाफ लगातार और सुनियोजित हमले करने का आरोप है। इस बार की सूची में भारत से भी दो नाम भी जुड़े हैं जिनमें डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ओपइंडिया और अदानी ग्रुप शामिल है।

यह लिस्ट हर साल 2 नवंबर को ‘पत्रकारों के खिलाफ अपराधों में दंडमुक्ति खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ पर जारी की जाती है। इसे RSF के वार्षिक वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की सहायक सूची माना जाता है। इस सूची में उन लोगों, संगठनों, कंपनियों और सरकारों को जगह दी जाती है जो पत्रकारों को मारते हैं, खामोश करते हैं, जेल भेजते हैं, हमला करते हैं, मीडिया को दबाते हैं, पत्रकारिता को बदनाम करते हैं या फिर पत्रकारिता के तरीकों का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए करते हैं।

दुनिया भर के अन्य खतरनाक नामों में शी जिनपिंग की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बेलारूस के अलेक्जेंडर लुकाशेंको, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली इजरायली सेना जो अब तक करीब 220 पत्रकारों की मौत के लिए जिम्मेदार है, म्यांमार की सैन्य परिषद, बुर्किना फासो के कप्तान इब्राहिम ट्राओरे की सैन्य सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के मालिक एलन मस्क जो पत्रकारों को परेशान करने के लिए अपनी साइट का इस्तेमाल करते हैं, शामिल हैं।

अडानी ने मानहानि को बनाया हथियार  

RSF के अनुसार भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत करीबी हैं। 2017 से अब तक अडानी समूह और उसकी कंपनियों ने 15 से ज्यादा आलोचक पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ करीब 10 मुकदमे ठोके हैं। ये ज्यादातर मानहानि के सिविल और क्रिमिनल केस हैं, जिन्हें जानबूझकर लंबा खींचा जाता है ताकि स्वतंत्र मीडिया चुप हो जाए।

2025 की अपनी ताजा सूची में RSF ने बताया कि अडानी ने 8 पत्रकारों और 3 मीडिया हाउस के खिलाफ दो मानहानि के मुकदमे किए, जिनमें अदालत ने बिना दूसरी पक्ष को सुने ही अंतरिम आदेश दे दिया। इसके तहत अडानी खुद तय कर सकते हैं कि कौन सी खबर “मानहानिकारक” है। यह आदेश अज्ञात तीसरे पक्षों पर भी लागू होता है, यानी अनलिमिटेड सेंसरशिप की गुंजाइश बन जाती है। इसके फौरन बाद द वायर, न्यूज़लॉन्ड्री, HW न्यूज़ और पत्रकार रवीश कुमार जैसे लोगों को कंटेंट हटाने के नोटिस भेजे गए।

तकनीक का इस्‍तेमाल कर प्रेस पर हमला

RSF का कहना है कि 2025 में प्रेस स्वतंत्रता पर हमला करने वाले लोग तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में ओपइंडिया इसका एक बड़ा उदाहरण है। यह वेबसाइट सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों पर बार-बार हमले करती है और खुद को “उदारवादी मीडिया कारटेल” के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बताती है। ट्रोल नेटवर्क की मदद से यह आलोचक पत्रकारों को बदनाम करने वाली कहानियां फैलाती है, उन्हें “सोरोस का साथी” या “भारत-विरोधी लॉबी” का सदस्य बताती है।

2025 में इसने पत्रकारों और मीडिया के खिलाफ 96 सामग्री प्रकाशित कीं, एक 200 पन्नों की तथाकथित रिपोर्ट छापी जिसमें षड्यंत्र सिद्धांतों के आधार पर कई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर मोदी सरकार के खिलाफ “नैरेटिव वॉर” छेड़ने और “भारत में सत्ता परिवर्तन” की साजिश रचने का आरोप लगाया गया। इन लेखों के बाद अक्सर संबंधित पत्रकारों पर संगठित ऑनलाइन उत्पीड़न की बौछार होती है।

मीडिया में अडानी समूह की हिस्‍सेदारी

मीडिया क्षेत्र में अडानी समूह की एंट्री हाल के वर्षों में तेजी से हुई है और यह अब ब्रॉडकास्टिंग, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट में सक्रिय है। समूह की सहायक कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क्स लिमिटेड के माध्यम से एनडीटीवी, क्विंटिलियन बिजनेस मीडिया (बीक्यू प्राइम) और इंडियन एजेंसी न्यूज सर्विसेज जैसे प्रमुख मीडिया समूहों पर नियंत्रण है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में अडानी एंटरप्राइजेज ने अपनी मीडिया शाखा में 900 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो 90 करोड़ शेयरों के माध्यम से किया गया। कुल मिलाकर, मीडिया क्षेत्र में अडानी का निवेश लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित है, जिसमें एनडीटीवी में 65 प्रतिशत हिस्सेदारी, क्विंटिलियन में पूर्ण अधिग्रहण और आईएएनएस में बहुमत हिस्सेदारी शामिल है।

इसके अलावा अडानी समूह की वेबसाइट के मुताबिक यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, एफएमसीजी, मीडिया, रियल एस्टेट सहित अन्‍य सेक्‍टर में काम कर रही है। बुनियादी ढांचे के तहत अडानी छह हवाई अड्डों का प्रबंधन करता है, जिसमें अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं, साथ ही मुंबई और नवी मुंबई हवाई अड्डों में हिस्सेदारी है।

ऊर्जा क्षेत्र में अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पावर जैसी कंपनियां प्रमुख हैं, जबकि परिवहन में भारत के सबसे बड़े पोर्ट नेटवर्क का संचालन किया जाता है। खनन अडानी ग्रुप के प्रमुख कार्यों में एक है। भारत में 15 कोयला ब्लॉकों का पोर्टफोलियो है, मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में स्थित है। इसके अलावा, डेटा सेंटर, रक्षा एवं एयरोस्पेस, सीमेंट और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ रहा है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के बारे में

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Reporters Without Borders), जिसे फ्रेंच में Reporters Sans Frontières (RSF) कहा जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है। जिसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

इस संगठन की स्‍थापना 1985 में फ्रांस में ही हुई थी। यह संगठन दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता की स्थिति पर निगरानी रखता है। पत्रकारों पर हमले, गिरफ्तारी, धमकी, हत्या या सेंसरशिप के मामलों को उजागर करता है। सेंसरशिप और मीडिया पर सरकारी नियंत्रण के खिलाफ अभियान चलाना भी इस संगठन के प्रमुख कामों में से एक है।

RSF खतरे में पड़े पत्रकारों को सुरक्षित जगह, कानूनी और वित्तीय मदद मुहैया कराता है। हर साल विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक () जारी करती है, जिसमें 180 देशों को प्रेस की आजादी के आधार पर रैंकिंग दी जाती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now