कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर नामचीन पत्रकारों की खामोशी

CJP

नई दिल्ली। बार बार हो रहे पेपर लीक, NEET-CBSE घोटालों को लेकर सोशल मीडिया से उभरकर सड़क पर उतरी Cockroach Janata Party (CJP) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन को लेकर देश के प्रमुख पत्रकारों की प्रतिक्रियाएं सीमित रहीं। पिछले दो दिनों में कई टॉप नामों ने या तो अप्रत्यक्ष टिप्पणी की या पूरी तरह खामोश रहे।

द वायर हिन्दी के पूर्व संपादक आशुतोष भारद्वाज ने 6 जून को स्पष्ट ट्वीट किया, ‘कांग्रेस का इकोसिस्टम कॉकरोच आन्दोलन को बदनाम करने पर तुला है. एकदम स्पष्ट है।’

उन्होंने CJP को कांग्रेस इकोसिस्टम द्वारा बदनाम किए जाने का आरोप लगाया। द वायर की ही अरफा खानम शेरवानी ने कहा कि अभी हम समय लेंगे कोई टिप्पणी करने में अभी हम आंदोलन को देख रहे हैं।

बीबीसी हिन्दी की पत्रकार सर्वप्रिय सांगवान ने युवा आंदोलन का समर्थन करते हुए लिखा: ‘CJP कोई बड़ी चीज़ नहीं, पर आप तो हैं… बड़प्पन दिखाओ भाई थोड़ा। सीखने दो युवाओं को कि धूप कैसी लगती है, सड़क पर कैसा लगता है। पुलिस का डर क्या होता है।’

उन्होंने CJP पर लगातार आलोचना करने वालों को सत्ता जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया।

पुण्य प्रसून वाजपेयी ने CJP या कॉकरोच का सीधा जिक्र नहीं किया। उन्होंने शिक्षा मुद्दों, पेपर लीक और सिस्टम की विफलता पर सामान्य पोस्ट किए, लेकिन जंतर-मंतर प्रदर्शन पर चुप्पी साधे रहे।

अभिसार शर्मा ने भी डायरेक्ट CJP का नाम नहीं लिया। NEET पेपर लीक, छात्र आत्महत्याओं और BJP सरकार की जवाबदेही की कमी पर पोस्ट किए, लेकिन CJP प्रदर्शन को स्पष्ट रूप से संबोधित नहीं किया।

रवीश कुमार भी पिछले दो दिनों में पूरी तरह खामोश रहे। मई के अंत में उन्होंने CJP को युवा प्रतिरोध की नई आवाज बताया था, लेकिन जून के शुरुआती दिनों में कोई नया ट्वीट नहीं आया।

अजीत अंजुम ने भी कोई नया ट्वीट नहीं किया। मई में उन्होंने CJP से जुड़े सौरव दास का इंटरव्यू लिया था, लेकिन हालिया प्रदर्शन पर चुप रहे।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास सक्रिय रहे। उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति, प्रेस कॉन्फ्रेंस और पार्टी लाइन पर कई अपडेट दिए।कुल मिलाकर टॉप पत्रकारों में CJP पर सक्रिय बहस सीमित रही।

कुछ ने आलोचना या समर्थन किया, जबकि कई प्रमुख नामों ने खामोशी बरती। यह खामोशी युवा आंदोलन के प्रति मुख्यधारा मीडिया की उदासीनता को दर्शाती है या फिर घटना को अभी प्रारंभिक चरण में मानने का संकेत है।

CJP मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर जेन जेड द्वारा शुरू किया गया मुवमेंट है। जंतर-मंतर पर सैकड़ों युवा पहुंचे, जहां कॉकरोच मास्क, संविधान पोस्टर और नारे लगे।

कुछ रिपोर्ट्स में इसे फ्लॉप बताया गया, जबकि समर्थकों ने इसे शुरुआती सफलता करार दिया।

इस घटनाक्रम से साफ है कि शिक्षा सुधार और परीक्षा घोटालों का मुद्दा युवाओं को जोड़ रहा है, लेकिन मुख्यधारा के पत्रकार अभी इसे पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे। आशुतोष और सर्वप्रिया जैसे कुछ ने अपनी राय रखी।

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