दंतेवाड़ा | इन दिनों पूरे बस्तर संभाग में औद्योगिक घरानों की बढ़ती गतिविधियों के बीच विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीते दिन बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा और जनता जोगी कांग्रेस के पदाधिकारियों ने संयुक्त पत्रकार वार्ता कर प्रदेश सरकार एवं NMDC–CMDC पर गंभीर आरोप लगाए।
पत्रकार वार्ता में मुक्ति मोर्चा के संभागीय संयोजक नवनीत चाँद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अघोषित रूप से केंद्र सरकार के इशारों पर कार्य कर रही है। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण बस्तर में NMDC और अन्य कंपनियों से मिलने वाले DMF (जिला खनिज न्यास) फंड के हजारों करोड़ रुपये का उपयोग अन्य राज्यों के चुनावों में किया जा रहा है।
चाँद ने कहा कि इस दावे का आधार यह है कि बीते एक वर्ष से जिले की किसी भी पंचायत में कोई नया निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि DMF फंड की राशि आखिर खर्च कहां की जा रही है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले उन्हें कांग्रेस का “एटीएम” कहा जाता था, वहीं अब वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भाजपा के लिए “क्रेडिट कार्ड” से कम नहीं हैँ।
पत्रकार वार्ता में दंतेवाड़ा जिले के भांसी क्षेत्र में प्रस्तावित डिपॉजिट नंबर-4 लौह अयस्क खनन परियोजना को लेकर भी गंभीर आपत्तियां जताई गईं। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए आयोजित ग्रामसभा की प्रक्रिया संदिग्ध है।
उनका कहना है कि सहमति प्रस्ताव में अधिकांश हस्ताक्षर कर्मचारियों के हैं, जबकि स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी नगण्य रही। यह पेसा एक्ट और वन अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन है। उन्होंने बैलाडीला के डिपॉजिट-13 के मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी ग्रामसभा फर्जी पाई गई थी, और भांसी में भी वही स्थिति दोहराई जा रही है।
मुक्ति मोर्चा और जोगी कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्याय के लिए उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
वही डीएमफ फंड के मनमाने बन्दर बाट और मुलभुत सुविधाओं का अनदेखा करने मे मामले मे सुकमा मे बस्तरिया राज मोर्चा और छात्र संगठन ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सुकमा जिला पंचायत उपाध्यक्ष महेश कुंजाम ने बताया कि सुकमा के अंदरूनी गांव मे मुलभुत सुविधाओं का बहुत बुरा हाल हैँ, सुकमा मे बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी के लिए लोग तरस रहे हैँ। डीएमफ मद का इस्तेमाल इन चीजों के लिए होना चाहिए, ग्राम पंचायतो का इनमे दखल होना चाहिए वरण इसके जिला प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायतो को अनदेखा किया जा रहा हैँ। मामले मे हजारों के तादात मे आये छात्रों ने अपना 10 सूत्रीय मांग प्रशासन को दिया और बताया कि इन मांगो का निराकरण जल्द नहीं होता तो आगे उग्र आंदोलन होगा।









