बस्तर। 2013 में झीरम कांड के मास्टर माइंड रहे 25 लाख रुपये के ईनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने सरेंडर कर दिया है। चैतू ने अपने 10 माओवादी साथियों के साथ बस्तर आईजी पी सुंदरराज के सामने आत्मसमर्पण किया।
चैतू छत्तीसगढ़ के दरभा डिवीजन में सक्रिय दंडकारण्य स्पेशल जोन कमेटी मेंबर था।
सरेंडर करने के बाद चैतू ने प्रेस से कहा कि महीनेभर पहले सरेंडर करने वाले सोनू दादा और रूपेश के विचारों से सहमत होकर मैं सरेंडर कर रहा हूं।
एंटी नक्सल ऑपरेशन में जवानों के बढ़ते दबाव और लगातार माओवादी संगठन के बड़े नेताओ के सरेंडर करने और बस्तर में चलाए जा रहे पूना मारगेम यानी कि घर वापस आइये अभियान से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
चैतू के अलावा 8 लाख के ईनामी डीसीवीएम सरोज, भूपेश उर्फ सहायक राम, प्रकाश, कमलेश उर्फ झितरु, जननी उर्फ रयमती कश्यप, संतोष उर्फ सन्नू, नवीन, रमशीला, जयती कश्यप ने सरेंडर किया है। इन सभी 10 नक्सलियों पर करीब 65 लाख का ईनाम घोषित था।
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के इन 10 माओवादियों का सरेंडर उस वक्त हुआ, जब माओवादी पार्टी के दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी की तरफ से ही प्रवक्ता विकल्प ने 22 नवंबर को एक प्रेस बयान जारी कर 18 और 19 नवंबर को आंध्रप्रदेश के मराडमल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर को ‘फर्जी’ बताया था।
इस मुठभेड़ में दो बड़े नक्सली कमांडरों माडवी हिड़मा और टेक शंकर के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। कुल 13 नक्सली ढेर हुए थे।
प्रवक्ता विकल्प ने इसी घटना के विरोध में 30 नवंबर को दंडकारण्य और छत्तीसगढ़ बंद बुलाने की घोषणा की है।
एंटी नक्सल ऑपरेशन के तहत लगातार हो रही मुठभेड़ का असर है कि माओवादी पार्टी की अलग-अलग कमेटियां ही नहीं बल्कि एक ही कमेटी भी दो धड़ों में बंट गई है। बसवराजू, कोसा दादा, राजू दादा, बालकृष्ण् और हिड़मा जैसे कई टॉप कमांडर और सेंट्रल कमेटी के मेंबर के मारे जाने और कईयों के सरेंडर करने के बाद माओवाद आंदोलन पहली बार इतना कमजोर पड़ा है।
यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोन के माओवादी 1 जनवरी को एक साथ करेंगे सरेंडर







