जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, शपथ ग्रहण में पहली बार सात देशों के मुख्य न्यायाधीश मौजूद

November 24, 2025 6:14 PM

Justice Surya kant : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने आज सुबह राष्ट्रपति भवन में भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने सबसे पहले अपनी बहन और बड़े भाई-भाभी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। परिवार के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी इस ऐतिहासिक समारोह में शिरकत की।

पहली बार इतना बड़ा विदेशी न्यायिक दल शामिल

इस शपथ ग्रहण समारोह की एक खास बात रही कि भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार सात देशों के मुख्य न्यायाधीश मौजूद रहे। ब्राजील, भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश अपने परिवार के साथ दिल्ली पहुंचे। इससे पहले किसी CJI के शपथ समारोह में इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल नहीं आया था।

14 महीने का होगा कार्यकाल

जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 तक मुख्य न्यायाधीश रहेंगे। उनका कार्यकाल करीब 14 महीने का होगा। वे पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 23 नवंबर को खत्म हुआ। हरियाणा के हिसार जिले से 50 किमी दूर पेटवार गांव में 10 फरवरी 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का जीवन प्रेरणा देने वाला है। उनके पिता संस्कृत के शिक्षक और साहित्यकार थे, मां गृहणी। 10वीं तक उन्होंने गांव में ही पढ़ाई की। पहली बार शहर तब देखा जब आगे की पढ़ाई के लिए बाहर गए।

1987 में जींद की सविता शर्मा से उनका विवाह हुआ। पत्नी सविता कॉलेज में अंग्रेजी की प्रोफेसर और प्रिंसिपल रह चुकी हैं। शादी के दौरान सूर्यकांत ने कहा था ‘दहेज़ में एक चम्मच भी नहीं लूंगा’। दोनों बेटियां मुग्धा और कनुप्रिया अभी पढ़ाई कर रही हैं। हर साल जस्टिस सूर्यकांत अपने गांव आते हैं। गांव के दोनों स्कूलों के टॉपर बच्चों को खुद सम्मानित करते हैं। पूर्वजों के नाम का तालाब देखने जरूर जाते हैं। घर में बथुआ की सब्जी, बाजरे की रोटी और कढ़ी बनती है। गांव में गौरव पट्ट पर उनका नाम सबसे ऊपर लिखा है।

कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका

जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में 1000 से ज्यादा महत्वपूर्ण फैसलों में हिस्सा लिया है।
कुछ बड़े फैसले:
आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को सही ठहराया
पुराने राजद्रोह कानून पर रोक लगाई
बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का आदेश
AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर दोबारा विचार का रास्ता खोला
पेगासस जासूसी मामले में जांच कमेटी बनवाई
डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय को पूरी तरह साफ कराने का आदेश

कानूनी करियर की झलक

1984 में हिसार से वकालत शुरू की
2000 में हरियाणा के सबसे कम उम्र के एडवोकेट जनरल बने
2004 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज
2018-19 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
मई 2019 से सुप्रीम कोर्ट के जज
आज 24 नवंबर 2025 से भारत के मुख्य न्यायाधीश

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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