शासन के आदेश की अनदेखी? दंतेवाड़ा में अब भी अन्य विभागों के कर्मचारी संभाल रहे मंडल संयोजक का प्रभार

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद (Dantewada) जिले में मंडल संयोजक के पदों पर अब भी अन्य विभागों के कर्मचारियों की पदस्थापना जारी है। शासन के आदेश के बाद भी शिक्षा विभाग के शिक्षक एवं व्याख्याता मंडल संयोजक का प्रभार संभाल रहे हैं, जिससे शासन के निर्देशों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दरअसल, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने 7 जुलाई 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट किया था कि मंडल संयोजक का प्रभार अन्य विभागों के अधिकारियों अथवा कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि मंडल संयोजक का पद विभागीय योजनाओं, छात्रावासों एवं आश्रमों के संचालन, पर्यवेक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। इसलिए इस पद पर विभाग के ही पात्र कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

शासन ने यह भी उल्लेख किया है कि अन्य विभागों के कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने से उन्हें विभागीय योजनाओं एवं कार्यप्रणाली की पर्याप्त जानकारी नहीं रहती, जिससे प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं, शिकायतें बढ़ती हैं तथा कई मामलों में न्यायालयीन विवाद की स्थिति भी निर्मित होती है।

आदेश के अनुसार यदि किसी विकासखंड में मंडल संयोजक का पद रिक्त हो तो संबंधित विकासखंड के वरिष्ठ छात्रावास अधीक्षक अथवा विभागीय लिपिक संवर्ग के कर्मचारी को प्रभार दिया जाए। यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में किसी अन्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी या शिक्षक को यह दायित्व देना आवश्यक हो, तो इसके लिए राज्य शासन से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

दंतेवाड़ा जिले में वर्तमान स्थिति

जानकारी के अनुसार शासन का आदेश जारी होने के बाद भी जिले के चारों विकासखंडों में शिक्षा विभाग के कर्मचारी मंडल संयोजक का प्रभार संभाल रहे हैं।

अशोक नाग – मूल पद: प्रधान अध्यापक, प्राथमिक शाला चंदेनर; वर्तमान में दंतेवाड़ा विकासखंड के मंडल संयोजक।

लिंगा राम मरकाम – मूल पद: शिक्षक; वर्तमान में कुआकोंडा विकासखंड के मंडल संयोजक।

धीरज नाग – मूल पद: शिक्षक, माध्यमिक शाला गुड़से, कटेकल्याण; वर्तमान में कटेकल्याण विकासखंड के मंडल संयोजक।

रविन्द्र टीकम – मूल पद: व्याख्याता (अंग्रेजी), शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गीदम; वर्तमान में गीदम विकासखंड के मंडल संयोजक।

सूत्रों के अनुसार शासन के आदेश के बाद भी इन कर्मचारियों को मंडल संयोजक के प्रभार से मुक्त नहीं किया गया है। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या जिले में शासन के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है, अथवा इन नियुक्तियों के लिए राज्य शासन से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किया गया है।

क्या बोले सहायक आयुक्त ट्राइबल

इस संबंध में सहायक आयुक्त, आदिम जाति विकास विभाग से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि “शासन के आदेश का पालन किया जाना है। फिलहाल जिले में उपयुक्त विभागीय अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। जैसे ही उपयुक्त विकल्प मिलेगा, विभागीय कर्मचारियों को मंडल संयोजक नियुक्त कर दिया जाएगा।”

हालांकि, उल्लेखनीय है कि जिले में वर्तमान में 21 आश्रम अधीक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि विभाग में इतने अधीक्षक मौजूद हैं तो उन्हें मंडल संयोजक की जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त क्यों नहीं माना जा रहा है।

उठ रहे हैं कई सवाल

शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अन्य विभागों के कर्मचारियों से मंडल संयोजक का कार्य लिया जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब यह देखना होगा कि आदिम जाति विकास विभाग एवं जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और शासन के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कोई कार्रवाई करते हैं या नहीं।

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