रायपुर। आईआईएम रायपुर में चल रही तीन दिवसीय डीजी–आईजी कॉन्फ्रेंस (DG–IG Conference) के दूसरे दिन 29 नवंबर को देश की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर दिनभर विस्तृत चर्चा हुई।
कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग में तकनीक के उपयोग और महिला सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। जन-आंदोलनों से निपटने के लिए इंटीग्रेटेड सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया गया।

दूसरे दिन इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने देश की आतंरिक सुरक्षा पर प्रजेंटेशन दिया। आखिरी दिन यानी कि 30 नवंबर को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का पड़ोसी देशों से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक तनावों पर प्रजेंटेशन होगा। इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश की तरफ से भारत को अस्थिर किए जाने के संबंध में किए जा रहे प्रयासों की रिपोर्ट होगी।

कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए अजीत डोभाल, डायरेक्टर आईबी तपन डेका, राॅ चीफ भी मौजूद थे।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर सम्मेलन को लेकर प्रतिक्रिया दी। पीएम ने लिखा, ‘रायपुर में डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन में भारत की सुरक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई। यह इस क्षेत्र में किए गए अच्छे और नए कार्यों को एक दूसरे से साझा करने का बेहतरीन मंच है।’
सम्मेलन के दूसरे दिन पिछले सम्मेलन की सिफारिशों के क्रियान्वयन की समीक्षा हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा पर IB ने प्रजेंटेशन दिया। इसके अलावा पुलिसिंग में चुनौतियां और 2047 की पुलिसिंग के लिए रोड मैप तैयार करने पर चर्चा हुई। आईबी के स्पेशल डायरेक्टर ने इस पर प्रजेंटेशन दिया।
इसके अलावा बैठक में एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन को लेकर चर्चा हुई कि किस तरह से काम करना है।
महिलाओं की सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का उपयोग, जन-आंदोलनों से निपटने के लिए इंटीग्रेटेड सिस्टम की जरूरत, विदेशों में रहने वाले भगोड़ों को वापस लाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर भी सभी ने अपनी राय रखी। इस पर अलग से प्लानिंग कर काम करने पर सहमति बनी। इसमें पुलिस सिस्टम में बदलाव जरूरत पर जोर दिया गया। देश के कई बड़े आर्थिक अपराधी दूसरे देशों में हैं जिन्हें लाने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जाने की जरूरत पर चर्चा हुई।
इसके अलावा पुलिसिंग में ज्यादा से ज्यादा रिजल्ट देने के लिए फोरेंसिक तकनीक और अभियोजन सुधार पर चर्चा हुई। इसमें यह तय किया गया कि हर छोटे से छोटे अपराध की भी फॉरेंसिक जांच हो।
मेजबान छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम ने बस्तर 2.0 विषय पर प्रजेंटेशन दिया। इसमें नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण के बाद बस्तर क्षेत्र में विकास की नई संभावनाओं का प्रजेंटेशन दिया। इस मॉडल को देशभर की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
30 नवंबर को सम्मेलन के अंतिम दिन कई हाई-टेक और रणनीतिक विषयों पर फोकस रहेगा। पुलिसिंग में एआई आधारित निगरानी, अपराध के पूर्वानुमान यानी कि बेसिक और मुखबिर पुलिसिंग पर फोकस बढ़ाने और संसाधनों के प्रबंधन पर फोकस होगा। इसके अलावा विदेशी हस्तक्षेप और उससे निपटने की रणनीतियों जिसमें फेक न्यूज और गलत सूचना अभियानों और बाहरी खतरों से निपटने पर चर्चा होगी।
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