SIR को भाकपा माले ने बताया ‘फासीवादी आक्रमण’

November 1, 2025 1:15 AM
CPI ML

रायपुर। चुनाव आयोग के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को ‘फासीवादी आरएसएस/भाजपा सरकार का जनविरोधी एजेंडा’ बताते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माले (CPL ML) रेड स्टार की छत्तीसगढ़ राज्य कमेटी ने प्रगतिशील ताकतों से एकजुट होकर इसका कड़ा प्रतिरोध करने की अपील जारी की है।

राज्य कमेटी ने बिहार के बाद 12 राज्यों में शुरू हो रही इस प्रक्रिया को देश की बड़ी आबादी को मताधिकार और नागरिकता से वंचित करने की साजिश बताया, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

पार्टी ने SIR की कठोर शर्तों को तत्काल रद्द करने, स्वयं घोषणा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रमाणपत्र को पर्याप्त मानने तथा घर-घर पूछताछ बंद करने की मांग की है।

राज्य कमेेटी के प्रवक्ता सौरा ने कहा कि यह अभियान बिहार से शुरू होकर पूरे देश में फैल रहा है, जिसका मकसद ‘घुसपैठियों’ के नाम पर जनता को डराना और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देना है। विभाजन का दंश झेल चुके भारत में नागरिकता तय करने की यह कुटिल जल्दबाजी असंवैधानिक है। चुनाव आयोग को संविधान ने नागरिकों से अतिरिक्त कागजात मांगने या व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने का अधिकार नहीं दिया।

उन्होंने चेतावनी दी कि SIR के तहत 2002 की मतदाता सूची में नाम होना या 11 दस्तावेजों में से एक दिखाना जैसे नियम लाखों लोगों के लिए असंभव हैं, जो गरीब, आदिवासी और प्रवासी मजदूरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगे।

चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर को घोषणा की कि SIR का दूसरा चरण 28 अक्टूबर से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो रहा है, जिसमें अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुदुच्चेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

इस अभियान के तहत सभी 51 करोड़ मतदाताओं को 4 दिसंबर तक विशेष गणना फॉर्म भरना होगा, अन्यथा उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हट सकता है।

नाम ट्रेस करने के लिए 2002-2005 की पुरानी मतदाता सूचियों से लिंक करना होगा, अन्यथा नागरिकता के प्रमाण के रूप में दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे। आधार कार्ड पहचान प्रमाण के रूप में मान्य है, लेकिन जन्मतिथि या निवास के लिए नहीं।

छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, जहां बूथ लेवल अधिकारी (BLO) फॉर्म वितरित कर रहे हैं। लेकिन भाकपा(माले) ने इसे ‘घर-घर पूछताछ की घिनौनी कोशिश’ बताते हुए विरोध जताया।

पार्टी ने मांग की कि मृत और फर्जी मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया जारी रखी जाए, लेकिन ‘घुसपैठियों’ के नाम पर भय का माहौल बनाने वाली चाल बंद हो। इसके बजाय, प्रत्येक गांव और वार्ड में शिविर लगाकर नाम दर्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में SIR के लिए 95 फीसदी लोगों को नहीं देना होगा कोई दस्तावेज

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। 2022 से दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन खबरें लिखीं। दैनिक भास्‍कर से पहले नवभारत, नईदुनिया, पत्रिका अखबार में 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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