रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित एथेनॉल उद्योगों (Ethanol Plants) को लेकर जल संकट की आशंका का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।
सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि जिले में स्थापित किए जा रहे एथेनॉल संयंत्र भविष्य में पानी की उपलब्धता पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से घरघोड़ा विकासखंड के ग्राम सरायपाली में प्रस्तावित नवदुर्गा फ्यूल्स प्रा. लि. के 100 केएलपीडी क्षमता वाले एथेनॉल प्लांट को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़, जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर मयंक श्रीवास्तव के माध्यम से मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को ज्ञापन सौंपते हुए इस परियोजना की स्वीकृतियों और जल उपयोग संबंधी आंकड़ों की जांच की मांग की है।
ज्ञापन पर विनय शुक्ला, वासुदेव शर्मा, राजेश त्रिपाठी, संजय देवांगन, अभिषेक चौहान, आलोक शर्मा, परेश मैती, चंद्रमणि बरेठ, आदर्श श्रीवास, शिवम कच्छवाहा और अन्य लोगों के हस्ताक्षर हैं।
जल उपयोग के आंकड़ों पर सवाल
ज्ञापन में कहा गया है कि नवदुर्गा फ्यूल्स की परियोजना रिपोर्ट के अनुसार 100 केएलपीडी प्रतिदिन एथेनॉल उत्पादन के लिए 571 केएलपीडी पानी की आवश्यकता बताई गई है तथा जल स्रोत के रूप में केलो नदी के जलाशय का उल्लेख किया गया है, जो संयंत्र स्थल से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है।
वहीं, ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से जुड़े अधिकारियों द्वारा 2024 में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार एक लीटर एथेनॉल उत्पादन में कहीं अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।
सामाजिक संगठनों का आरोप है कि दोनों आंकड़ों में भारी अंतर है, जिसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
पहले से औद्योगिक दबाव झेल रहा क्षेत्र
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित संयंत्र के आसपास पहले से ही दो दर्जन से अधिक छोटे-बड़े इस्पात और अन्य उद्योग संचालित हैं, जिनकी जल आवश्यकताएं भी केलो जलाशय और सिंचाई विभाग के स्रोतों पर निर्भर हैं।
संगठनों का कहना है कि यदि अतिरिक्त जल दोहन की अनुमति दी जाती है तो भविष्य में जिले में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
नीति आयोग की चिंताओं का भी दिया हवाला
ज्ञापन में नीति आयोग और विभिन्न राज्यों में एथेनॉल उत्पादन के कारण जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक जैसे राज्यों में जल संकट को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।
संगठनों ने रायगढ़ में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई है।
स्वीकृतियों की जांच और कार्रवाई की मांग
सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि नवदुर्गा फ्यूल्स प्रा. लि. को दी गई पर्यावरणीय और अन्य स्वीकृतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में नए जल-आधारित उद्योगों की अनुमति देते समय भूजल स्तर, मौजूदा औद्योगिक दबाव और भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए।
हालांकि, ज्ञापन में किए गए दावों और जल उपयोग संबंधी आंकड़ों पर संबंधित विभागों अथवा कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और तकनीकी परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









