रायपुर। Chhattisgarh राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। विभिन्न श्रेणियों में 20 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। साथ ही कृषि पंप कनेक्शनों की बिजली दरों में भी इजाफा किया गया है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आम लोग पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। रसोई गैस, किराना, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसे रोजमर्रा के खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं। अब बिजली बिल में और इजाफा होने से मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों और घरेलू उपभोक्ताओं का मासिक बजट और भी प्रभावित होने वाला है।
किसानों पर सबसे ज्यादा असर
कृषि पंपों पर बिजली महंगी होने से खेती की लागत बढ़ जाएगी। डीजल, खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि छोटे और सीमांत किसानों की मुश्किलें बढ़ा देगी और उनकी आय पर असर पड़ेगा।
व्यापारियों पर भी बोझ
छोटे व्यापारी और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ेगा। इससे दुकानों, छोटे उद्योगों और सेवाओं की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। यानी आम उपभोक्ता को अप्रत्यक्ष रूप से दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।
द लेंस ने पहले ही बता दिया था कि बिजली महंगी होगी।
जनता की चिंता
बिजली दरों में यह वृद्धि उस वक्त हुई है जब छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनी पर पहले से ही हजारों करोड़ रुपये का सरकारी बकाया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी आम जनता की जेब पर बोझ बन रही है जबकि कंपनी की वित्तीय समस्याओं का समाधान अभी भी लंबित है।
सरकार से अपील
विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार को महंगाई के इस दौर में आम परिवारों, किसानों और छोटे व्यवसायियों को राहत देने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा लोगों की पहुंच से बाहर न हो जाए।









