CG NEWS: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर में स्थित मंगल कार्बन प्लांट में 5 फरवरी 2026 को एक भीषण औद्योगिक हादसा हुआ। प्लांट में पुराने टायरों को गलाकर रिसाइक्लिंग करने की प्रक्रिया चल रही थी तभी बॉयलर या गैस टैंक में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। इससे आग की लपटें और गर्म गैसें फैल गईं, जिसकी चपेट में आकर कुल 8 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें 9 महीने की मासूम बच्ची भूमि खड़िया भी शामिल थी, जिसके शरीर का 80-90% हिस्सा झुलसा हुआ था।
बच्ची को पहले रायगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर रायपुर के कल्दा बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर रेफर किया गया। यहां 9 फरवरी शाम 4:05 बजे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया है। घायलों में बच्ची की मां उदासिनी खड़िया (25 वर्ष, 30-40% झुलसे), साहेब लाल खड़िया (45 वर्ष, 80-90%झुलसे), शिव खड़िया (27 वर्ष, 80-90%झुलसे), कौशल (25 वर्ष, 70-80%झुलसे), इंदीवर (19 वर्ष, 80-90%झुलसे), प्रिया (32 वर्ष, 70-80%झुलसे) शामिल हैं।
कई घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है, सांस लेने में तकलीफ के कारण कुछ को वेंटिलेटर पर रखा गया है और वे बोलने की स्थिति में नहीं हैं। पुलिस ने हादसे के बाद FIR दर्ज की है। जांच में प्लांट में सुरक्षा मानकों की लापरवाही सामने आई है, जिसके बाद प्लांट को सील कर दिया गया और मुख्य प्रबंधक समेत दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हादसे का मुख्य कारण बॉयलर में दबाव बढ़ना या तकनीकी खामी माना जा रहा है, लेकिन पूरी जांच जारी है।
पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों ने अब गंभीर आरोप लगाए हैं कि प्लांट प्रबंधन द्वारा घायल मजदूरों और उनके परिजनों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे FIR वापस लें और पुलिस में दिए बयान बदल दें। परिवारों का कहना है कि बच्ची की मां उदासिनी रोजाना बच्ची को साथ लेकर प्लांट में काम करती थीं और बच्ची को टंकी के पास सुलाकर ड्यूटी करती थीं। यह फैक्ट्री में बच्चों को लेकर काम करने की पूरी तरह गैरकानूनी और असुरक्षित व्यवस्था को उजागर करता है, जो फैक्ट्री एक्ट, श्रम कानूनों और बाल सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भ्रामक खबर फैलाई गई कि बच्ची सिर्फ टिफिन देने आई थी लेकिन परिवार इसे सिरे से खारिज करते हैं। परिवारों ने प्रशासन से तत्काल मांग की है कि मृतक बच्ची के परिजनों को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए सभी घायलों का इलाज का पूरा खर्च प्लांट मालिक से वसूला जाए, दबाव डालने की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो, दोषी प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे बिना डर के न्याय की लड़ाई लड़ सकें। यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं रहा, बल्कि औद्योगिक लापरवाही, मजदूरों के अधिकारों, मानवाधिकारों और कानून व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।










