लेंस डेस्क। नेपाल की राजनीति में शनिवार सुबह भारी हलचल मच गई। रैपर से राजनेता बने युवा नेता बलेंद्र शाह (बालेन शाह) के प्रधानमंत्री पद संभालते ही उनकी सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में पिछले साल के Gen Z आंदोलन के दौरान हुई लापरवाही और हिंसा की जांच रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला लिया। इसके बाद पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भक्तपुर के गुंडू से और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया।

ratopati.com और onlinekhabar.com की रिपोर्ट के मुताबिक इस एक्शन के बाद नेपाल में विपक्ष एक ओर जहां विरोध कर रहा है और कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए हैं, वहीं जनता खासकर युवा समर्थन में हैं।
पुलिस ने ओली को सुबह 3-4 बजे के आसपास गिरफ्तार किया। दोनों को काठमांडू पुलिस परिसर भद्रकाली में रखा गया है और रविवार को अदालत में पेश किया जाएगा। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए युवा-प्रधान आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में करीब 76 लोगों की मौत हुई थी।
रिपोर्ट में पूर्व PM ओली, पूर्व गृह मंत्री लेखक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (IGP) चंद्रकुबेर खापुंग पर आपराधिक लापरवाही (धारा 181-182) का आरोप लगाया गया है। इन पर 10 साल तक की सजा हो सकती है।
गिरफ्तारी के बाद ओली ने कहा कि यह “प्रतिशोधपूर्ण” कार्रवाई है और वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उनके वकीलों ने इसे “अनावश्यक और गैर-कानूनी” बताया।
ओली के अलावा किन पर तलवार लटक रही है?
गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट में सिर्फ ओली और लेखक ही नहीं, कई अन्य शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं। आपराधिक जांच की सिफारिश पूर्व IGP चंद्रकुबेर खापुंग पर भी है।
इसके अलावा विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पूर्व गृह सचिव गोकरणमणि दुवाडी, सशस्त्र प्रहरी बल प्रमुख राजु अर्याल, राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग प्रमुख हुतराज थापा, काठमांडू के तत्कालीन सीडीओ छबिलाल रिजाल और कई अन्य पुलिस अधिकारियों जैसे AIG सिद्धि विक्रम शाह, DIG ओम बहादुर राणा आदि पर की गई है। जेनजी मूवमेंट नेपाल ने सरकार से इन सभी जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
नेकपा (एमाले) पार्टी अध्यक्ष ओली की गिरफ्तारी को “राजनीतिक प्रतिशोध” और “चरित्र हनन” बताया गया। पार्टी ने आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाई। कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए काठमांडू में टायर जलाकर यातायात बाधित किया, जांच आयोग की रिपोर्ट जलाई और सुदूरपश्चिम प्रदेश में भी प्रदर्शन हुए। पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने इसे “पूर्व नियोजित साजिश” करार दिया।
पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक उनके वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी के गैर-गठबंधन गुट के नेताओं ने बैठक कर रणनीति बनाई। नेपाल तरुण दल ने गिरफ्तारियों की निंदा की और सरकार को “गलत फैसला” सुधारने की चेतावनी दी। पूर्व राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने गिरफ्तारियों पर आपत्ति जताई है।
जनता ने क्या कहा?
जेनजी मूवमेंट नेपाल ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर दमनकर्ताओं को बचाने की कोई साजिश हुई तो देशव्यापी युवा आंदोलन होगा। नागरिक समाज में प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। कुछ इसे “कानून का राज” बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक बदला मान रहे हैं। निर्माण उद्योग परिषद ने ओली की गिरफ्तारी की निंदा की।
नई सरकार के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने स्पष्ट किया, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यह किसी के खिलाफ बदला नहीं, बल्कि न्याय की शुरुआत है। अब देश नई दिशा लेगा।”









