कोलकाता। पश्चिम बंगाल मंगलवार को सियासी वार पलटवार से गर्माया रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बांग्लादेशी घुसपैठ को हथियार बनाकर सीएम ममता बनर्जी पर हमले किए, तो ममता ने आई डोंट केयर कह कर उनके हमले पर पलटवार कर दिया।
कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध न कराने के चलते भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का काम अधर में लटका हुआ है, जिससे घुसपैठ की समस्या बढ़ रही है। शाह का कहना था कि ममता बनर्जी वोट बैंक की राजनीति के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को प्रोत्साहित कर रही हैं, जबकि प्रदेश के लोग इस मुद्दे से काफी परेशान हैं। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा सत्ता में आई तो न सिर्फ घुसपैठियों की पहचान करेगी, बल्कि उन्हें देश से बाहर भी निकालेगी।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर है, जिससे विकास कार्य ठप हो गए हैं। केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं यहां सिंडिकेट राज की भेंट चढ़ गई हैं। पिछले कई वर्षों से बंगाल भय और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। उन्होंने कहा कि 2026 में भाजपा की सरकार बनते ही बंगाल की संस्कृति और विरासत को पुनर्जीवित किया जाएगा।
चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए शाह ने बताया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बंगाल में 17 फीसदी वोट और दो सीटें मिली थीं। 2016 के विधानसभा चुनाव में 10 प्रतिशत वोट के साथ तीन सीटें हासिल हुईं। 2019 में वोट शेयर 41 फीसदी तक पहुंचा और 18 सीटें जीतीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में 38 फीसदी वोटों से 77 सीटें मिलीं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में 39 प्रतिशत वोट के साथ 12 सीटें हासिल हुईं। उनका दावा था कि मात्र तीन सीटों से शुरू हुआ सफर अब 77 तक पहुंच चुका है और 2026 में भाजपा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी।
अमित शाह तीन दिन के बंगाल दौरे पर सोमवार शाम कोलकाता पहुंचे थे। 2026 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ममता बनर्जी का जोरदार जवाब
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और आरोपों को ‘आई डोंट केयर’ कहते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि SIR के बहाने आम नागरिकों को तंग किया जा रहा है और यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। तंज कसते हुए ममता ने शाह को महाभारत के दुर्योधन व दुशासन से जोड़ा और कहा कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे चरित्र बंगाल पहुंच जाते हैं। शाह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी परवाह नहीं।
ममता ने दावा किया कि केंद्र 1.5 करोड़ नाम मतदाता सूची से काटने की बात कर रहा है, जो जल्दबाजी में राजनीतिक लाभ के लिए हो रहा है। अगर बंगाल में आतंकवाद है तो पहलगाम या दिल्ली जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल भी उन्होंने उठाया।
जमीन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने रेलवे प्रोजेक्ट्स, कोयला खदानों और पेट्रापोल, चांग्राबांध जैसे बॉर्डर इलाकों में जमीन मुहैया कराई है। उन्होंने केंद्र पर कई योजनाएं जैसे 100 दिनों का काम और सर्व शिक्षा अभियान रोकने का इल्जाम लगाया। SIR के तहत राजबंशी, मतुआ और आदिवासी समुदायों के नाम काटे जा रहे हैं, जिसका उदाहरण देते हुए पुरुलिया की एक घटना का जिक्र किया, जहां सुनवाई के दौरान एक बुजुर्ग की मौत हो गई।
ममता ने पूछा कि आधार कार्ड होने के बावजूद नाम क्यों हटाए जा रहे हैं। साथ ही बताया कि राज्य में औद्योगीकरण, हाईवे निर्माण और हर जिले में शॉपिंग मॉल बन रहे हैं, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों को मुफ्त जगह मिलेगी।
अंत में उन्होंने अपील की कि ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए 54 लाख नामों वाले लोग दोबारा आवेदन करें और फॉर्म 7 व 8 भरें। उनका आरोप था कि दिल्ली में बैठे भाजपा आईटी सेल के लोग जानबूझकर नाम काट रहे हैं।











