झीरम कांड मास्टरमाइंड के सरेंडर के बाद पूर्व CM ने उठाए सवाल, कहा – क्या NIA पूछताछ करेगी?

November 29, 2025 8:28 PM
Jhiram Kand

रायपुर। 25 मई 2015 को छत्तीसगढ़ के दरभा घाटी में हुए झीरम घाटी हमले के मास्टरमाइंड चैतू के सरेंडर के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाया है कि क्या अब एनआईए उस मास्टरमाइंड से पूछताछ करेगी और यह पता लगाएगी कि इस भीषण हमले की साजिश किसने रची और क्यों रची।

बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा इस जांच को आगे बढ़ने से रोकती रही है, जबकि सत्य सामने आना चाहिए।

25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सहित 32 लोगों की मौत हुई थी।

घटना ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति को झकझोर दिया था। हमले के दो दिन बाद मामला एनआईए को सौंपा गया।

एनआईए ने सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट और अक्टूबर 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 150 से अधिक नक्सलियों को आरोपी बताया गया।

एनआईए की जांच पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे। पीड़ित परिवारों और कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि ‘बड़ी राजनीतिक साजिश’ की कड़ी जांच में शामिल नहीं की गई।

कई गवाहों, सुरक्षा अधिकारियों और हमले में घायल बचे लोगों से विस्तृत पूछताछ नहीं की गई। वर्षों तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से संदेह और बढ़ा।

2018 में जब प्रदेश में सरकार बदली तो भूपेश बघेल की सरकार ने 2019 के बाद झीरम कांड की पुनः जांच की कोशिश की। पीड़ित परिवारों की शिकायतों के आधार पर 2020 में दरभा थाने में ‘बड़े षड्यंत्र’ को लेकर नई FIR दर्ज की गई।

इस FIR पर रोक लगाने के लिए एनआईए ने अदालत में याचिका दायर की, लेकिन निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट दोनों ने एनआईए की अपील खारिज कर दी। नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एनआईए की याचिका ठुकरा दी और राज्य पुलिस को साजिश की कड़ी की जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।

बघेल ने इसे ‘न्याय के दरवाज़े खुलने जैसा फैसला’ बताया था। उनका कहना है कि झीरम कांड सिर्फ नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी साजिश थी जिसकी परतें अब भी अनखुली हैं।

हालांकि दिसंबर 2023 में प्रदेश में फिर से सत्ता परिवर्तन हो गया और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य पुलिस को जांच का अधिकार मिल चुका है। लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की वजह से 2020 में दरभा थाने में दर्ज एफआईआर पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकी।

अब जब घटना का कथित मास्टरमाइंड आत्मसमर्पण कर चुका है, तो भूपेश बघेल ने उम्मीद जताई कि एनआईए और संबंधित एजेंसियों को अब साजिशकर्ताओं तक पहुंचने में देर नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में सच्चाई सामने आने से आखिर किसे डर है और भाजपा जांच को आगे बढ़ने से क्यों रोकती रही।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 13 वर्षों का अनुभव है। 2022 से दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन खबरें लिखीं। दैनिक भास्‍कर से पहले नवभारत, नईदुनिया, पत्रिका अखबार में 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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