भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण और अडानी समूह द्वारा इसे खरीदने की चर्चाओं के बीच इस्पात मंत्रालय और बीएसपी प्रबंधन ने इन दावों को भ्रामक बताया है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक टीम ने भी इन खबरों का खंडन किया है। इससे पहले भी इसी मुद्दे पर चर्चाएं चली थीं, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्थानीय विधायकों ने चिंता जताई थी।
14 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आशंका व्यक्त की थी कि अडानी समूह के प्रतिनिधि बीएसपी देखने आ रहे हैं। उन्होंने लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर बीएसपी पर है और उनके करीबी खरीददार प्लांट का दौरा कर सकते हैं। बघेल ने साफ कहा कि बीएसपी छत्तीसगढ़ की आत्मा है और इसे किसी भी हाल में बिकने नहीं देंगे। उन्होंने भाजपा नेताओं से भी अपील की कि वे भी प्लांट को बचाने के लिए आवाज उठाएं।
भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी मजबूती से विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि अंबानी-अडानी को बीएसपी खरीदने नहीं देंगे। उनके अनुसार बीएसपी सिर्फ एक कारखाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान और हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है। यादव ने कहा कि वे आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेंगे और प्लांट को बिकने नहीं देंगे।
इस पर वैशाली नगर के भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास बीएसपी को अडानी या किसी निजी कंपनी को बेचने से जुड़े दस्तावेज हैं तो उन्हें सार्वजनिक करें। सेन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अफवाहें फैला रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वास्तव में निजीकरण की कोशिश हुई तो वे सबसे पहले धरने पर बैठेंगे और भूपेश बघेल व देवेंद्र यादव के घर के बाहर भी प्रदर्शन कर सकते हैं।
इस बीच इस्पात मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इन दावों का खंडन किया है। पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने स्पष्ट किया कि बीएसपी को बेचने की कोई योजना नहीं है।
दरअसल, चर्चा की शुरुआत अडानी टोटल गैस लिमिटेड (एटीजीएल) और बीएसपी के बीच हुए समझौते से हुई। 16 जुलाई 2026 को दोनों के बीच पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) सप्लाई का एमओयू साइन हुआ था। इस समझौते के तहत प्लांट की इकाइयों के साथ-साथ भिलाई टाउनशिप के 15,000 से अधिक घरों और कई कैंटीनों में गैस पहुंचाने का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
इस बीच विशाखापट्टनम स्टील प्लांट (आरआईएनएल) के निजीकरण को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध और हड़तालों ने भिलाई के कर्मचारियों को भी चिंतित कर दिया है। मजदूर संगठन इन चर्चाओं से शशंकित हैं और निजीकरण की आशंकाओं को लेकर बातचीत तेज हो गई है। उनके लिए बीएसपी सिर्फ कारखाना नहीं बल्कि सुरक्षा और स्वाभिमान का प्रतीक है।
सरकार संसद में बता चुकी है कि बीएसपी के विस्तार के लिए 31,000 करोड़ रुपये की योजना पर काम चल रहा है फिर भी भिलाई में मजदूरों और आम लोगों के बीच चर्चाएं जारी हैं, मजदूर संगठन सशंकित नजर आ रहें हैं।










