लेंस डेस्क। मध्य प्रदेश के एक शहर में गरबा आयोजन को लेकर युवाओं के विरोध का एक बेहद अनूठा और चर्चा का विषय बना हुआ मामला सामने आया है। व्यावसायिक यानी ‘पैड गरबे’ (Paid Garba) की अनुमति निरस्त होने से नाराज सैकड़ों Gen-Z (जेन-जी) युवक-युवतियों ने धरना-प्रदर्शन करने के बजाय एक अलग ही रास्ता चुना। वे सीधे हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदोरिया के घर पहुंच गए, वहां जमकर गरबा किया, नेताजी का सम्मान किया और उन्हें धन्यवाद दिया।
क्या है पूरा मामला?
शहर में पिछले कई वर्षों से युवाओं का एक समूह व्यावसायिक स्तर पर ‘पैड गरबे’ का आयोजन करता आ रहा है। इस बार भी नवरात्रि के दौरान आयोजन की पूरी तैयारी थी, लेकिन अचानक स्थानीय प्रशासन ने इसकी अनुमति निरस्त कर दी।
आयोजकों और युवाओं का आरोप है कि हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदोरिया के नेतृत्व में थाने का घेराव किया गया था, जिसके दबाव में आकर पुलिस-प्रशासन ने यह अनुमति रद्द कर दी। अनुमति रद्द होने से आयोजकों को भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसी बात से खफा होकर युवाओं ने अनूठे तरीके से विरोध दर्ज कराने का फैसला किया।
क्षीर सागर से निकाली गई धन्यवाद यात्रा, घर के बाहर किया गरबा
सिर पर लाल चुनरी बांधे, माथे पर तिलक लगाए और हाथों में माता की चुनरी थामे सैकड़ों की संख्या में युवक-युवतियां ‘क्षीर सागर’ क्षेत्र से ‘जय माता दी’ के नारे लगाते हुए निकले। यह जुलूस सीधे हिंदूवादी नेता अर्जुन सिंह भदोरिया के आवास पर पहुंचा।
घर के बाहर गरबा और आरती: युवाओं ने नेताजी के घर के बाहर ही पारंपरिक अंदाज में गरबा किया। साथ ही, बालिकाओं को माता के स्वरूप में बैठाकर उनकी आरती उतारी गई और प्रसाद बांटा गया।
दुपट्टा पहनाकर किया ‘सम्मान’: जब अर्जुन सिंह भदोरिया घर के बाहर आए, तो युवाओं ने उन्हें दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया और व्यंग्यात्मक व अनोखे अंदाज में पैड गरबे की अनुमति रद्द करवाने के लिए ‘धन्यवाद’ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए दोनों पक्षों को समझाइश दी और इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की।
आयोजकों का पक्ष: ‘हमारा मकसद युवाओं को धर्म से जोड़ना था’
इस अनोखे प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अनिकेत वर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी से टकराव करना नहीं, बल्कि युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि वे पिछले पांच सालों से सभी कानूनी और प्रशासनिक अनुमतियां लेकर ही गरबा आयोजित कर रहे थे।
वर्मा ने बताया कि इस बार आयोजन के जरिए नौ देवियों का इतिहास और संस्कृति प्रस्तुत करने की योजना थी। सुरक्षा के लिए प्रवेश द्वार पर जांच और तिलक लगाने जैसी कड़े इंतजाम भी किए गए थे, फिर भी ऐन वक्त पर अनुमति रद्द कर दी गई।
18 से 20 लाख रुपये के नुकसान का दावा
पैड गरबा के एक अन्य आयोजक हर्षवर्धन राणा ने बताया कि इतने बड़े आयोजनों की तैयारी महीनों पहले शुरू करनी पड़ती है। सुरक्षा के लिए बाउंसर, हाई-फाई साउंड सिस्टम, भव्य मंच, टेंट हाउस और मेहमानों के ठहरने आदि के लिए भारी एडवांस भुगतान करना पड़ता है।
अचानक अनुमति निरस्त होने से आयोजकों को 18 से 20 लाख रुपये का तगड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। वेंडर्स और टेंट हाउस को दिया गया अग्रिम पैसा वापस मिलने की उम्मीद भी न के बराबर है। आयोजकों का कहना है कि इस कार्रवाई से उन्हें न केवल आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन युवाओं की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है जो सालभर इस पर्व का इंतजार करते हैं।







