नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोयल ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस ने अपने शासनकाल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को पार्टी टिकट, मंत्री पद और राज्यपाल जैसे पद दिए थे।
एमएस गिल को पद्म विभूषण और बाद में मंत्री पद देने पर उठाए सवाल
गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने उन्हें पद पर रहते हुए साल 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। गिल दिसंबर 1996 से जून 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। इसके बाद 2004 में वे कांग्रेस में शामिल हुए और राज्यसभा सांसद बने। साल 2008 में मनमोहन सिंह सरकार में उन्हें युवा मामले और खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। बाद में वे कैबिनेट मंत्री भी बने। गोयल ने सवाल उठाया कि पद पर रहते हुए सम्मान देने और सेवानिवृत्ति के बाद राजनीतिक पद सौंपने को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।
टीएन शेषन को कांग्रेस ने दिया था लोकसभा टिकट
गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का भी जिक्र किया। शेषन 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और चुनाव सुधारों के लिए जाने जाते हैं। साल 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें गुजरात की गांधीनगर सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। गोयल ने इसे कांग्रेस की ओर से पूर्व चुनाव आयुक्तों को राजनीति में लाने का उदाहरण बताया।
आरके त्रिवेदी को बनाया गया था गुजरात का राज्यपाल
केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त आरके त्रिवेदी की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया। त्रिवेदी जून 1982 से दिसंबर 1985 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। सेवानिवृत्ति के करीब दो महीने बाद फरवरी 1986 में राजीव गांधी सरकार के दौरान उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया। गोयल ने इस नियुक्ति को लेकर भी कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए।
नवीन चावला की नियुक्ति पर भी कांग्रेस को घेरा
गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व के प्रभाव में चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया था, जबकि तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की थी। इसके अलावा उन्होंने केरल की पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रत्ना यू. केलकर को चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाए जाने का मामला भी उठाया।
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सियासी टकराव
गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। वहीं, भाजपा कांग्रेस के पुराने फैसलों का हवाला देकर उसके आरोपों पर सवाल उठा रही है।
हालांकि, पूर्व चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद दिए जाने के उदाहरण अपने आप में यह साबित नहीं करते कि उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग ने किसी पार्टी के पक्ष में काम किया था। इसी तरह विपक्ष की ओर से मौजूदा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप भी जांच और तथ्यों के आधार पर परखे जाने का विषय हैं।








