राहुल-प्रियंका आकाशवाणी कैंपस में धरने पर, अखिलेश-अभिषेक हिरासत में,CEC के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली . मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी दलों का ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ पुलिस ने रोक दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी (Rahul and Priyanka) वाड्रा को पुलिस ने हिरासत में लेकर बस में बैठाया, लेकिन वे बस से उतरकर आकाशवाणी बिल्डिंग में घुस गए और वहीं धरने पर बैठ गए।

आकाशवाणी परिसर से चुनाव आयोग का कार्यालय करीब 270 मीटर दूर है। विपक्षी नेताओं ने नई संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। प्रदर्शन अब तक ढाई घंटे से ज्यादा समय से जारी है।

पुलिस ने विपक्षी सांसदों को तीन बार रोका। इस दौरान राहुल गांधी हाथ में तिरंगा लेकर बैरिकेड्स पर चढ़ गए। वे ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ लिखा पोस्टर भी लेकर पहुंचे थे। यह पोस्टर खास तौर पर युवा मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने के लिए था। देश में हर चौथा मतदाता जेन-जी वर्ग का है। 2024 लोकसभा चुनाव में 18 से 29 साल के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22.78 प्रतिशत थी।

अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी भी हिरासत में लिए गए। अखिलेश यादव ने कहा, “अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए। यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। पुलिस को बच्चों और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।”

भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के इस प्रदर्शन को जनादेश का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की चिंता नहीं, बल्कि हार की खीझ है।

विपक्ष की पांच मुख्य मांगें

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
  2. मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की पूरी जानकारी बूथ और विधानसभा स्तर पर सार्वजनिक हो। किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले नोटिस और अपील का मौका मिले।
  3. SIR प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाता बाहर हो सकते हैं। भविष्य के चुनावों में पुरानी मतदाता सूची का इस्तेमाल हो।
  4. EVM की जगह बैलट पेपर से चुनाव कराए जाएं। पहली बार वोट देने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन आसान हो।
  5. INDIA गठबंधन के दल पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे पर एकजुट रहें।

सपा सांसद जया बच्चन ‘PDA’ वाले पोस्टर लेकर पहुंचीं। PDA का मतलब है पिछड़ा (OBC), दलित और अल्पसंख्यक। उत्तर प्रदेश में इन तीन वर्गों की आबादी करीब 80 प्रतिशत है। सपा इन वर्गों को जोड़कर अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

यह चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में पिछले पांच दिनों में सातवां प्रदर्शन है। विपक्षी दल कह रहे हैं कि लोकतंत्र में अंतिम अधिकार जनता का होना चाहिए।

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