ये केवल उपचुनाव है!’ — सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, नंदीग्राम–रेजीनगर के हजारों वोटर वोट नहीं दे पाएंगे?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े लंबित अपीलों के मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने से मना कर दिया। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने वाले हैं।

रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को देखते हुए मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था।मुख्य न्यायाधीश कांत ने टिप्पणी की, “ये केवल उपचुनाव हैं, बस इतना ही।”एसआईआर से जुड़ी अपीलें शीर्ष अदालत के आदेश पर नियुक्त अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं।

तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने वाले वकील ने कहा कि मामला 29 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन अब 5 अक्टूबर को सूचीबद्ध दिख रहा है।वकील ने कहा, “हम तत्काल निर्देश चाहते हैं ताकि इसे उससे पहले सूचीबद्ध किया जा सके। 18,000 से अधिक अपीलें लंबित हैं जिनका निपटारा नहीं हुआ है। ये लोग पहली बार चुनावों में भाग नहीं ले सके।”

वकील ने आगे कहा कि यह दूसरी बार होगा जब लोग मतदान से वंचित रह जाएंगे।इसके बाद अदालत ने कहा कि मामला 5 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया जाएगा।7 अगस्त तक, मार्च 2026 से अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं द्वारा दायर 38 लाख अपीलों में से केवल 2 प्रतिशत का ही निपटारा हुआ था।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से आरटीआई के जवाब के अनुसार, जिन अपीलों का निपटारा हुआ, उनमें 75,443 मामलों में मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया, जबकि 7,339 मामलों में उन्हें बाहर रखा गया।यानी निपटाई गई अपीलों में से 91.13 प्रतिशत में शामिल करने का फैसला आया। इन मतदाताओं को इस साल हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वोट डालने की अनुमति नहीं दी गई।

यह आरटीआई जवाब कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी के आवेदन पर दिया गया था। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया से उत्पन्न अपीलों की जानकारी मांगी थी।जवाब से पता चला कि कुल अपीलों में से 37,27,838 यानी 97.83 प्रतिशत अभी भी लंबित हैं। अब तक हर 46 में से केवल 1 अपील का ही निपटारा हुआ है।

पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाता हाल के विधानसभा चुनावों में वोट डालने के अधिकार से वंचित रह गए, क्योंकि एसआईआर के बाद वे मतदाता सूची से बाहर हो गए थेउनकी अपीलें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। इससे पहले अदालत ने इस प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया था।

मई में शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग की एसआईआर करने की शक्ति को बरकरार रखा था। हालांकि अदालत ने यह भी कहा था कि आयोग सीमित उद्देश्य से यह जांच सकता है कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं, ताकि यह तय किया जा सके कि उसे मतदाता सूची में शामिल किया जाए या नहीं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now