रायपुर। CGPSC राज्य सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया की ED रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें 8 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अब ED उन्हें 23 सितंबर को दोबारा कोर्ट में पेश करेगी।
चेतन बोरघरिया को ED ने 11 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें छह दिन की कस्टोडियल रिमांड पर भेजा था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश हुआ।
ED की जांच CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है। एजेंसी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान मिले दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन और बयानों का विश्लेषण किया जा रहा है।
ED का आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा में मदद और चयन का भरोसा देकर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई। जांच में उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर के नाम सामने आने की बात कही गई है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में अलग-अलग लेन-देन के जरिए 66.64 लाख रुपये नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। ED करीब 170 लेन-देन की भी जांच कर रही है। इसके अलावा उत्कर्ष चंद्राकर की ओर से बोरघरिया के खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
ED का आरोप है कि अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रभाव और संपर्क का भरोसा दिया गया था और इस पूरे नेटवर्क में चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का इस्तेमाल किए जाने की जांच की जा रही है।
चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे। इससे पहले वह तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD रह चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी CGPSC मामले की जांच में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
ED की जांच अभी जारी है। एजेंसी द्वारा पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, किसी अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।









