नई दिल्ली।बिहार के सहरसा सदर अस्पताल में मिड-डे-मील की खबर कवरेज के दौरान एक पत्रकार के साथ मारपीट और बदसलूकी का मामला गरमा गया है। घटना के बाद जिलाधिकारी ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। वही प्रदेश भर के डॉक्टर्स ने पत्रकारों को इलाज में तरजीह देने से इंकार करने का फरमान जारी किया है।
क्या था पूरा मामला
सहरसा जिले के एक सरकारी स्कूल में 12 सितंबर को मिड-डे-मील खाने से कई बच्चे बीमार पड़ गये। स्कूल प्रबंधन द्वारा बीमार बच्चों को सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी पर प्रभात खबर के पत्रकार खबर संकलन के लिए अस्पताल पहुंचे। इस दौरान पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट, गाली-गलौज और लूटपाट की गयी। आरोप है कि पत्रकार को ऑपरेशन थिएटर स्थित एक कमरे में बंद कर मारपीट की गयी, जिससे वह घायल हुए और उन्हें उपचार कराना पड़ा।
घटना के बाद प्रभात खबर की टीम जब ग्राउंड जीरो पर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. एस.के. आजाद से जवाब मांगने पहुंची, तो डॉक्टर से तीखी बहस हुई।
सवाल पूछने पर चुप हो गये डॉ. आजाद
जब डॉक्टर आजाद से पूछा गया कि 20-25 लोगों और पैरामेडिकल छात्रों की भीड़ ने पत्रकार को ओटी रूम में बंद कर क्यों पीटा, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि “सब कुछ फ्लो-फ्लो में हो गया।” हालांकि, जब उनसे गलती मानने और माफी मांगने को लेकर सवाल किया गया, तो उनकी बोलती बंद हो गई और उन्होंने चेंबर का दरवाजा बंद कर मीडिया को बाहर निकालने का प्रयास किया।
डीएम ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की
इधर, इस पूरे मामले पर सहरसा के जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। वहीं, बिहार के स्वास्थ्य विभाग और जिले के प्रभारी मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर से सीसीटीवी कैमरों के गायब होने और परिसर में पसरी भारी गंदगी को लेकर भी स्वास्थ्य प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिहार हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन का फरमान
IMA एवं BHSA की संयुक्त बैठक में बिहार के सभी चिकित्सक बंधुओं से अपील की गई कि किसी भी पत्रकार अथवा YouTuber को व्यक्तिगत अथवा संस्थागत स्तर पर किसी भी प्रकार का विज्ञापन, आर्थिक सहायता या अन्य वित्तीय सहयोग देने से परहेज करें। यदि कोई पत्रकार अथवा YouTuber अस्पताल में मरीज के रूप में आता है, तो उसे भी अन्य आम मरीजों की तरह निर्धारित नियम, पंजीकरण, कतार, प्राथमिकता एवं चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार ही सेवा दी जाए। केवल पत्रकार या YouTuber होने के आधार पर कोई विशेष उपचार, विशेष प्राथमिकता या अलग व्यवस्था नहीं की जानी चाहिए।








