नई दिल्ली। भारत में करीब छह दशक तक मौजूद रहने के बाद फोर्ड फाउंडेशन (Ford Foundation) ने नई दिल्ली के लोधी एस्टेट स्थित अपना दफ्तर खाली कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से 2025 में बेदखली की कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद फाउंडेशन ने 55, लोधी एस्टेट की जगह छोड़ दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब फोर्ड फाउंडेशन को 2015 में केंद्र सरकार की निगरानी सूची में रखा गया था। बाद में 2016 में उसका नाम इस सूची से हटा दिया गया था।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने 2025 में फोर्ड फाउंडेशन के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू की थी।
फोर्ड फाउंडेशन ने केंद्र सरकार के आदेश के बाद लोधी एस्टेट की जगह को खाली कर दिया है। फाउंडेशन 1960 के दशक से लोधी एस्टेट दफ्तर में काम कर रहा था। इस जगह को केंद्र सरकार ने भारत के नेतृत्व वाली दो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को दे दी है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने 2025 में फोर्ड फाउंडेशन के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू की थी। फाउंडेशन का 55, लोधी एस्टेट की प्रॉपर्टी का लीज भी खत्म हो गया था। उन्होंने कहा कि जब से फाउंडेशन ने जगह खाली की है, तब से कोई जबरदस्ती बेदखली नहीं की गई है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस साल फरवरी में बाहर चला गया था और मार्च में अपनी वेबसाइट पर अपने ऑफिस का पता 55, लोधी एस्टेट से अपडेट करके मौजूदा पता, लेवल 8, डीएलएफ सेंटर, संसद मार्ग कर दिया था।
फोर्ड फाउंडेशन ने द इंडियन एक्सप्रेस के सवालों का ईमेल पर कोई जवाब नहीं दिया। फोन पर और दिल्ली ऑफिस के दौरे के दौरान संपर्क करने पर उसके प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं थे। एमओएचयूए ने भी कमेंट के लिए किए गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
सोमवार को, एमओएचयूए के तहत आने वाले डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स ने फोर्ड फाउंडेशन की ऑफिस वाली जगह के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर को इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस को दे दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में आईबीसीए लॉन्च किया था। इसकी वेबसाइट के मुताबिक यह अभी दिल्ली के शांति निकेतन इलाके के एक घर से काम कर रहा है। ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस को पीएम मोदी ने 2023 में जी-20 समिट के हिस्से के तौर पर नई दिल्ली लीडर्स समिट के दौरान दुनिया के नेताओं की मौजूदगी में लॉन्च किया था। इसका ऑफिस अभी साउथ दिल्ली में भीकाजी कामा प्लेस के संरक्षण भवन में है।
लोधी एस्टेट में फोर्ड फाउंडेशन मुख्यालय को अमेरिकी आर्किटेक्ट जोसेफ स्टीन ने डिजाइन किया था, जिन्होंने दिल्ली में इंडिया हैबिटेट सेंटर और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर जैसी आजादी के बाद की मशहूर इमारतों को भी डिजाइन किया था।
फोर्ड फाउंडेशन 1960 के दशक से 55, लोधी एस्टेट कॉम्प्लेक्स में मौजूद था। यह जगह संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों का भी घर रही है, जो आज भी इसके कुछ हिस्सों में हैं।
सरकार के साथ काम करता रह फोर्ड फाउंडेशन
फोर्ड फाउंडेशन आजादी के बाद से कई अहम केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में करीब से शामिल रहा है, जिसमें पंचवर्षीय योजनाएं, खेती और शिक्षा के कार्यक्रम शामिल हैं।
फाउंडेशन की वेबसाइट के अनुसार, ‘फोर्ड फाउंडेशन ने 1952 में भारत सरकार के बुलावे पर नई दिल्ली में अपना ऑफिस बनाया था। शुरुआत से ही हमने देश के साथ मिलकर विकास की अहम जरूरतों और उम्मीदों को पूरा किया है। आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में फाउंडेशन ने देश के बड़े रिसर्च, एकेडमिक और प्रोफेशनल मैनेजमेंट संस्थान बनाने में मदद को प्राथमिकता दी।’
फोर्ड फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक जिन संस्थानों को फाउंडेशनल ग्रांट दिए गए हैं, उनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु और कोलकाता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट शामिल हैं।
वेबसाइट के अनुसार, ‘फाउंडेशन ने खड़गपुर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को रिसर्च के लिए शुरुआती सपोर्ट भी दिया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी को शुरुआती सपोर्ट दिया। हमने भारत के कई बड़े सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रमों को भी सपोर्ट किया है, जैसे 1950 के दशक में कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम, इंटेंसिव एग्रीकल्चरल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम और 1960 के दशक में हरित क्रांति की शुरुआत के साथ-साथ सेल्फ-हेल्प ग्रुप मूवमेंट।’
फाउंडेशन का क्या है फोकस?
फाउंडेशन का कहना है कि अभी उसका फोकस समावेशी और महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास है। हालांकि हाल का डेटा मौजूद नहीं था, लेकिन फाउंडेशन की वेबसाइट पर 2012 की आखिरी सालाना रिपोर्ट से पता चलता है कि उसने भारत,
नेपाल और श्रीलंका में 13.51 मिलियन डॉलर की ग्रांट दी थी। 31 दिसंबर 2025 को खत्म होने वाले साल के लिए फाउंडेशन के वित्तीय विवरण के मुताबिक उसने दुनिया भर में 773 मिलियन डॉलर की ग्रांट को मंजूरी दी थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय 2015 में फोर्ड फाउंडेशन को वॉचलिस्ट में डाल दिया था। गुजरात सरकार ने आरोप लगाया था कि यह फाउंडेशन कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट और सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस की भारत-विरोधी गतिविधियों को फंडिंग कर रहा है।
एमएचए ने फाउंडेशन को पहले अप्रूवल वाली श्रेणी में रखा था, जिसका मतलब है कि भारतीय संगठनों को इसके द्वारा दिए जाने वाले सभी फंड को पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी। मार्च 2016 में पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले एमएचए ने फाउंडेशन को लिस्ट से हटा दिया।









