दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात सामने आई है।
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को देशभर में बंद करने का आदेश दिया है। इसी आदेश के बाद प्रदर्शनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना मार्च वापस लेने का ऐलान कर दिया।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट में ही मार्च वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसे मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लेने का फैसला किया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी आरोपियों के लिए पूरी तरह राहत वाला नहीं है। दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात सामने आई है।
अदालत ने इस श्रेणी को सामान्य छात्र प्रदर्शनकारियों से अलग माना है। यानी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों को राहत मिलेगी, लेकिन गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच जारी रह सकती है।
CJP ने इससे पहले 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। संगठन का आरोप था कि सरकार ने जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और NEET से जुड़े मुद्दों पर दिए गए आश्वासनों को पूरी तरह लागू नहीं किया। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संगठन ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR को बंद करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं को लेकर देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज FIR पर आगे जांच या कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही, इन्हीं घटनाओं के संबंध में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
केंद्र सरकार के साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने भी संबंधित FIR को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अदालत ने इन मामलों के साथ ही आदेश का दायरा देशभर तक बढ़ा दिया।
CJP ने 5 सितंबर काे बुलाया था मार्च
दरअसल, CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर के मार्च का ऐलान किया था। संगठन का कहना था कि जुलाई में सरकार के साथ बातचीत के दौरान छात्रों के खिलाफ FIR वापस लेने और NEET से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने समेत कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन इन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
मंगलवार की सुनवाई में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने के अपने आश्वासन पर कायम है। केंद्र और दिल्ली पुलिस के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने भी संबंधित FIR खत्म करने के लिए आवेदन दिए हैं।
इसके बाद सौरव दास ने अदालत में CJP का बयान पढ़ते हुए कहा कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है। उन्होंने अदालत के आदेश का पालन करने की बात भी कही।
NEET से जुड़े आत्महत्या के मामलों में मुआवजा
सुनवाई के दौरान NEET-UG 2026 से जुड़े आत्महत्या के मामलों का मुद्दा भी उठा। केंद्र ने कहा कि वह ऐसे छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के आश्वासन पर कायम है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और तौर-तरीके तय करने के लिए तीन महीने का समय चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की नीति तैयार करने की प्रक्रिया को तीन महीने में पूरा करने का निर्देश दिया है।
CJI बोले- भरोसे से बातचीत हो तो हर मुद्दे का हल संभव
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने दोनों पक्षों के रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर विश्वास दिखाएं तो सभी मुद्दों को एक-एक करके सुलझाया जा सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि खुले मन से बातचीत के जरिए जटिल से जटिल समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और CJP द्वारा मार्च वापस लेने के बाद फिलहाल सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच टकराव की स्थिति टल गई है। जुलाई के आंदोलन से जुड़ी FIR पर भी अब कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी, सिवाय उन 2,873 लोगों के मामलों के जिन्हें गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर अलग रखा गया है।










