प्रयागराज। उत्तरप्रदेश के प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट (UP Firecracker Factory Blast) के बाद प्रशासन और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। लापरवाही के आरोप में एक इंस्पेक्टर, छह दरोगा समेत 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं फैक्ट्री का मालिक नौशाद मंगलवार तड़के पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी है।
सोमवार दोपहर हुए इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 8 बच्चे शामिल हैं। तीन शवों का पोस्टमॉर्टम प्रयागराज में, जबकि आठ शवों का पोस्टमॉर्टम कौशांबी में कराया जा रहा है। हादसे के अगले दिन भी घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम जारी है। पुलिस, NDRF, SDRF और फोरेंसिक टीम मौके पर जांच कर रही हैं।
हादसे के बाद की तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं। मृतकों में शामिल सुनील को खोजने के लिए उसके बुजुर्ग पिता सरजू दास घटनास्थल पर पहुंचे। उनका कहना है कि पोस्टमॉर्टम हाउस में उनके बेटे का एक पैर मिला है, लेकिन अभी धड़ नहीं मिला। घटनास्थल से उन्हें बेटे की बाइक भी मिली है।
पुलिस के मुताबिक एक अन्य लापता व्यक्ति सुनील मौर्य की पहचान की कोशिश भी जारी है। उसके पिता ने उसके शरीर का एक हिस्सा मिलने और पहचान करने का दावा किया है। पुलिस की टीम इसकी पुष्टि और पहचान की प्रक्रिया में जुटी है।
हादसे के बाद अवैध फैक्ट्री के संचालन और स्थानीय स्तर पर कथित लापरवाही को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं। IG प्रयागराज अजय कुमार मिश्रा ने कार्रवाई करते हुए पिपरी के पूर्व थाना प्रभारी इंस्पेक्टर शिवचरण राम, वर्तमान थाना प्रभारी दरोगा विकास सिंह, चरवा थाना प्रभारी विनय सिंह समेत दरोगा (एसआई) अजीत सिंह, अभिषेक गुप्ता, मनीष पाल और अमित द्विवेदी को निलंबित कर दिया।
इससे पहले तीन दरोगाओं को लाइन हाजिर किया गया था और दो बीट सिपाहियों को निलंबित किया गया था। अब तक 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
हादसे में अपने बच्चों को खोने वाले मीरपुर निवासी गया प्रसाद साहू की शिकायत पर पुलिस ने नौशाद और उसके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अवैध रूप से पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था, जिसके कारण विस्फोट हुआ।
FIR में नौशाद के अलावा उसका बेटा आदिल, पत्नी कहकशा बानो, भाई शकील, भाभी शबाना और भतीजी साइना के नाम शामिल हैं। पुलिस ने शबाना और साइना को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
मुठभेड़ के बाद फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार
फैक्ट्री मालिक नौशाद हादसे के बाद फरार था। मंगलवार तड़के पुलिस ने उसकी घेराबंदी की। पुलिस के मुताबिक नौशाद ने टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने उसके पास से एक अवैध तमंचा बरामद करने का दावा किया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोट के बाद नौशाद कहां-कहां छिपा और उसे फरार होने में किन लोगों ने मदद की।
सोमवार को करीब 11:30 बजे फैक्ट्री में अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के तीन मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि करीब पांच अन्य मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
शुरुआती जानकारी में एक महिला ने दावा किया था कि बिजली का खंभा गिरने के बाद फैक्ट्री में रखे बारूद में तेज धमाका हुआ। हालांकि, विस्फोट की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। फोरेंसिक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है और जांच के बाद ही धमाके के कारणों का पता चल सकेगा।
दो साल पहले रद्द हो चुका था लाइसेंस
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल फैक्ट्री के संचालन को लेकर है। जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा कि फैक्ट्री करीब दो साल से चल रही थी और उसका लाइसेंस भी रद्द हो चुका था।
कौशांबी से सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी सवाल उठाया कि जब फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द हो चुका था तो इसके बावजूद वहां पटाखों का निर्माण और बड़े पैमाने पर भंडारण कैसे जारी रहा। उन्होंने पूछा कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार चल रहा था और पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
हादसे के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री से करीब 400 मीटर दूर स्थित नौशाद के पटाखा गोदाम को भी बुलडोजर से ढहा दिया। सोमवार रात करीब साढ़े सात बजे इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
घटनास्थल पर सोमवार को करीब 10 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। पुलिस, एयरफोर्स, NDRF और SDRF के करीब 200 जवानों ने राहत और बचाव अभियान चलाया। मलबा हटाने के लिए करीब 10 बुलडोजर लगाए गए थे और देर रात तक रेस्क्यू जारी रहा।










