नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने (Aravali) पर्वतमाला की परिभाषा और सीमाओं से जुड़ी केंद्र सरकार की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है।
इस समिति को रिपोर्ट में आए मुद्दों और महत्वपूर्ण अस्पष्टताओं की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।समिति की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी। उन्हें 31 अगस्त 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का समय दिया गया है।
यह फैसला तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नया, वैज्ञानिक और पारिस्थितिकी आधारित आकलन जरूरी है। इसलिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाई गई है जो सभी पक्षों से बातचीत कर निष्पक्ष राय देगी।समिति के सदस्य
- सुभाष आशुतोष (भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक)
- राजेंद्र कुमार शर्मा (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक)
- बृज मोहन सिंह राठौड़ (पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव)
- प्रो. अशोक के. भटनागर (दिल्ली विश्वविद्यालय, वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष)
विशेष आमंत्रित सदस्य: - प्रो. जगदीश कृष्णास्वामी (बेंगलुरु)
- प्रो. लक्ष्मीकांत शर्मा (हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय)
कंचन देवी 1991 बैच की भारतीय वन सेवा अधिकारी हैं और फिलहाल ICFRE का नेतृत्व कर रही हैं।पृष्ठभूमियह कदम उस विवाद के बाद उठाया गया है जिसमें अरावली पहाड़ियों को 100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा पर सवाल उठे थे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया है कि नई समिति अपनी रिपोर्ट देने तक अरावली के किसी भी हिस्से में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।









