नई दिल्ली। Change.org पर ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को रोकने की मांग वाली एक याचिका ने 2,09,500 से अधिक सत्यापित हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए हैं। यह जानकारी याचिका के आयोजकों ने 20 मई 2026 को घोषित की।
“Save Earth — Stand for Change” पहल के तहत शुरू की गई यह याचिका भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अपील करती है कि द्वीप पर प्रस्तावित आवासीय टाउनशिप और होटल परियोजनाओं को वापस लिया जाए।
याचिका में सरकार से आग्रह किया गया है कि परियोजना के उन हिस्सों को छोड़ दिया जाए जिनमें बड़े पैमाने पर वनों की कटाई शामिल है। इसमें लगभग 9.6 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव है, जो 130 वर्ग किलोमीटर प्राथमिक जंगल को प्रभावित करेगा।
81,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना वर्ष 2021 में केंद्र सरकार की समग्र विकास दृष्टि के तहत शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य अंडमान सागर में स्थित इस द्वीप को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाना है। परियोजना में शामिल प्रमुख तत्व हैं:
- अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल
- ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
- गैस और थर्मल पावर कॉम्प्लेक्स
- 6.5 लाख लोगों तक की आबादी वाला टाउनशिप
द्वीप की वर्तमान आबादी सिर्फ 8,000 से थोड़ी अधिक है, जो परियोजना के बाद 80 गुना से भी अधिक बढ़ने की उम्मीद है। इससे लंबे समय तक स्थिरता और संसाधनों पर दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।पर्यावरणीय और सामाजिक चिंताएंयाचिका में निम्नलिखित खतरों को रेखांकित किया गया है:
- लेदरबैक कछुए (Leatherback Turtle) — भारतीय महासागर में इसका प्रमुख अंडा देने का स्थान इस द्वीप पर है।
- गलाथिया बे (Galathea Bay) के कोरल रीफ्स को खतरा।
- शोम्पेन जनजाति — जो विलुप्त प्राय जनजाति है और जिनकी संख्या 300 से भी कम है।
वर्ष 2025-26 में निकोबरी ट्राइबल काउंसिल ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने परियोजना के लिए सामुदायिक सहमति का झूठा प्रमाण-पत्र दिया हैफरवरी 2026 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पर्यावरणीय मंजूरी में दखल देने से इनकार कर दिया। अदालत ने पर्याप्त सुरक्षा उपायों और परियोजना के सामरिक महत्व का हवाला दिया।हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट में अभी भी कानूनी चुनौतियां जारी हैं।
सरकार का कहना है कि स्वदेशी समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं, जिसमें वन अधिकार अधिनियम 2006 का पालन शामिल है। पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया गया है और इन्हें “संतुलित सुरक्षा उपायों” के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा।









