नेशनल ब्यूरो,नई दिल्ली। भारतीय रिफाइनरियों Indian refineries ने अमेरिकी सैंक्शंस को दरकिनार कर अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की करीब 60 मिलियन बैरल खरीदने का सौदा किया हैं। ब्लूमबर्ग ने आज अज्ञात सूत्रों के हवाले से यह खबर दी। सूत्रों के अनुसार ये कार्गो $5 से $15 प्रति बैरल के प्रीमियम पर खरीदे गए हैं। इससे पता चलता है कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत में रूसी तेल की भूख अभी भी बहुत मजबूत है। ब्लूमबर्ग ने बताया कि अप्रैल के लिए तय मात्रा इस महीने की खरीद के बराबर है लेकिन फरवरी की तुलना में दोगुनी है।
वाशिंगटन ने भारत जैसे आयातकों को कीमत के दबाव से राहत देने के लिए 30 दिनों की छूट जारी की थी।यह छूट मार्च 2026 में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधा को देखते हुए दी गई थी। इसके तहत भारतीय रिफाइनरियों को उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने की अनुमति मिली जो 5 मार्च, 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुके थे। यह रियायत मुख्य रूप से 4 अप्रैल, 2026 तक के लिए वैध थी।
अब लगता है कि भारतीय अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि यह छूट बढ़ा दिया जाएगा क्योंकि मध्य पूर्व से सप्लाई अभी लौटने वाली नहीं है वहां हमले जारी है। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान को सीजफायर का प्रस्ताव देने की खबरों से तेल की कीमतों पर दबाव पड़ा, लेकिन यह असर अस्थायी हो सकता है जब तक शब्दों के बाद कार्रवाई न हो।
अमेरिकी सैंक्शन से छूट जारी होने के बाद समुद्र में रूसी तेल के कार्गो के लिए होड़ मच गई। शिपिंग डेटा के मुताबिक, कई टैंकर चीन की ओर जा रहे थे, लेकिन वे रास्ते में मुड़कर भारतीय खरीदारों को सप्लाई करने लगे। मार्च के पहले दो हफ्तों में ही पानी पर रूसी कच्चे तेल की मात्रा 20 मिलियन बैरल से ज्यादा घट गई। जो रोजाना 2 मिलियन बैरल से अधिक की ड्रॉडाउन रेट के बराबर है । रूसी तेल के आयात में इस उछाल के कारण भारत इस महीने फिर से नंबर-वन सप्लायर बन सकता है। फरवरी में सैंक्शन के कारण रूस पहला स्थान खोकर इराक के पीछे चला गया था











