लेंस डेस्क। तेलंगाना में हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले थिपरी थिरुपति उर्फ देवजी (Devuji) ने केंद्र और राज्य सरकार से सीपीआई (माओवादी) पर लगे प्रतिबंध को हटाने और इसे मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
देवजी ने तेलंगाना क्षेत्रीय टीवी चैनलों से बातचीत में कहा कि अगर केंद्र सरकार वास्तव में देश में माओवादियों के सशस्त्र आंदोलन को खत्म करना चाहती है, तो उसे सीपीआई (माओवादी) को एक वैध राजनीतिक दल घोषित करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने संगठन से जुड़े गिरफ्तार नेताओं और समर्थकों को राजनीतिक कैदी घोषित कर रिहा करने की भी मांग की।
उन्होंने बताया कि यह मांग उन्होंने हाल ही में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंता रेड्डी से राज्य सचिवालय में मुलाकात के दौरान भी रखी थी।
देवजी ने कहा कि अगर पार्टी पर से प्रतिबंध हटा लिया जाता है, तो माओवादी संगठन अपने सैन्य विंग पीएलजीए(पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को पूरी तरह भंग करने का आह्वान कर सकता है।
देवजी के मुताबिक, माओवादी आंदोलन अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है क्योंकि अधिकांश नेता और कैडर हथियार छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध हटने के बाद बाकी बचे नेता और कार्यकर्ता भी मुख्यधारा में आ सकते हैं और संविधान के दायरे में रहकर जनता के अधिकारों के लिए काम कर सकते हैं।
हालांकि देव जी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि माओवादी चुनावी राजनीति में उतरेंगे या विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
देवजी ने पार्टी के कुछ अन्य नेताओं पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि केंद्रीय समिति के सदस्य मलोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू और टक्कापल्ली वासुदेव राव उर्फ अशन्ना ने पार्टी को कमजोर करने के लिए पुलिस के साथ मिलकर साजिश की।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत भी अंदरूनी विश्वासघात का नतीजा थी।
देवजी ने यह भी कहा कि माओवादी आंदोलन की एक बड़ी कमजोरी यह रही कि संगठन बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों के अनुसार अपनी रणनीति नहीं बदल सका। उनका कहना है कि संगठन जंगलों और आदिवासी इलाकों तक सीमित रह गया और मैदान व शहरी क्षेत्रों में अपना नेटवर्क नहीं बढ़ा पाया।
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