द लेंस स्पेशल,नई दिल्ली। यह खबर आपको चौंका सकती है मगर सच है। द लेंस को जानकारी मिली है कि ईरान से जुड़े एक हैकर समूह ने 11 मार्च को एक अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा कंपनी पर जबरदस्त साइबर हमला (cyber attack) किया है। इस खबर की पुष्टि इंस्टीट्यूट फॉर स्टडी ऑफ द वार ( IPW) ने अपने ताजा विश्लेषण में की है। इस हमले से 15 करोड़ नागरिकों का जिसमें भारत भी शामिल है स्वास्थ्य संबंधी डाटा संकट में पड़ गया है।
ईरानी हैकर ग्रुप हंडाला ने ‘स्ट्राइकर’ को बनाया निशाना
IPW का कहना है कि यह हमला संभवतः अमेरिकी प्रशासन पर राजनीतिक दबाव डालने के लिए किए गए प्रयास का हिस्सा है। दो दिनों पहले ईरान से जुड़े एक हैकर समूह हंडाला ने “स्ट्राइकर” को निशाना बनाकर साइबर हमला किया, जिससे कंपनी का वैश्विक नेटवर्क और आईटी सिस्टम फेल हो गया।
कौन है स्ट्राइकर
स्ट्राइकर एक अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा कंपनी है जो 15 करोड़ से अधिक रोगियों को स्वास्थ्य उपकरण और सेवाएं प्रदान करती है। हंडाला नाम के साइबर ग्रुप ने स्ट्राइकर हैक की जिम्मेदारी ली। हंडाला ईरान से जुड़ा एक हैकर समूह है जो 2022 में उभरा और उसने कई अन्य साइबर हमलों का दावा किया है। इस समूह में 16 से 220साल के युवक सक्रिय हैं।
28 फरवरी के बाद हुआ हमला
यह साइबर हमला 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से किसी अमेरिकी कंपनी पर किया गया पहला ईरानी साइबर हमला है जो अमेरिकी ही नहीं दुनिया भर के स्वास्थ्य सेवा के ढांचे के लिए बड़ा खतरा है।
भारत में भी है स्ट्राइकर का दफ्तर
जेमिनी के अनुसार स्ट्राइकर कॉर्पोरेशन एक प्रमुख अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी है। 1941 में डॉ. होमर स्ट्राइकर द्वारा शुरू की गई यह कम्पनी 75 से अधिक देशों में सक्रिय है और सालाना लगभग 15 करोड़ मरीजों को प्रभावित करती है। स्ट्राइकर भारत में सक्रिय है। इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है और इसके अन्य कार्यालय मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी स्थित हैं।











