रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पिछले 15 वर्षों से 43,301 अंशकालीन सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं, जो निर्धारित दो घंटे के बजाय 90% स्कूलों में रिक्त चतुर्थ श्रेणी पदों के कारण पूरे दिन भृत्य और चपरासी के काम करते हैं, लेकिन उन्हें मात्र 3,000-3,500 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जो महंगाई के दौर में परिवार पालने के लिए अपर्याप्त है, जिससे वे कर्ज लेकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। aandolan ki khabar
कर्मचारियों की मेहनत और लगन को देखते हुए प्रधान पाठक कल्याण संघ और शिक्षक संगठन ने उनकी मांगों, जैसे चतुर्थ श्रेणी पदों पर समायोजन, पूर्णकालिक कलेक्टर दर पर वेतन, 12 माह का मानदेय, और नियुक्ति पत्र, का समर्थन किया है। युक्तियुक्तकरण के तहत 10,463 स्कूल बंद होने से कर्मचारियों का समायोजन अन्य स्कूलों में करने की मांग भी उठी है।
भारतीय जनता पार्टी के 2023 घोषणा पत्र में 50% वेतन वृद्धि और पूर्णकालिक वेतन का वादा किया गया था लेकिन 20 माह बाद भी कोई कार्रवाई न होने से कर्मचारी 15 जून 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। 17 जुलाई को स्कूल शिक्षा सचिव के साथ बैठक में मांगों पर पहल का आश्वासन मिला पर कोई प्रगति न होने से आक्रोश बढ़ रहा है।
इसके विरोध में 31 अगस्त 2025 को नया रायपुर में धरना दिया गया और रैली निकाल कर घंटो सड़क जाम किया गया, इस प्रदर्शन के दौरान sdm और भारी संख्या में पुलिस बल भी बुलाये गए और प्रशासन की तरफ से बातचीत कर समस्या का हल निकाले जाने की बात की गयी है। प्रदर्शन इतना उग्र किया गया की पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा, फिलहाल संगठन ने मांगें न माने जाने पर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।