नई दिल्ली। पेपर लीक पर सख्त कानून बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और कदम बढ़ाते हुए गुरुवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश कर दिया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश किया, जिसके बाद इस पर चर्चा शुरू हुई। सरकार और विपक्ष के बीच इस अहम विधेयक पर करीब सात घंटे तक बहस होने की संभावना है। वंदे मातरम् बिल राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पास हो गया है। इस दौरान काफी हंगामा हुआ। स्पीकर ने इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल सजा और जुर्माने का प्रावधान बढ़ाने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2024 में ही इस मुद्दे पर प्रभावी और मजबूत कानून लाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया। खड़गे के मुताबिक, इसका नतीजा यह हुआ कि पेपर लीक कराने वाले बचते रहे और लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ।
वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष की प्रतिक्रिया से साफ है कि वह 2024 के कानून और मौजूदा संशोधनों की आवश्यकता को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने वर्षों से लंबित नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को संस्थागत रूप देने का काम किया है और उम्मीद जताई कि विपक्ष भी इस पहल की सराहना करेगा। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में करीब सात घंटे की चर्चा के बाद पारित हो चुका है। संशोधन के तहत पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने, दोषियों को 10 साल तक की सजा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अब राज्यसभा से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
लोकसभा से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
इससे पहले बुधवार को लोकसभा ने लंबी चर्चा और हंगामे के बाद इस संशोधन विधेयक को पारित कर दिया था। विधेयक पर करीब 11 घंटे तक बहस चली थी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के आंदोलन को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।









