नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब से कुछ ही देर में संसद में केंद्रीय बजट (Budget 2026) पेश किया। यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक रहा है। रविवार को बजट पेश किया गया। निर्मला सीतारमण नौवीं बार बजट पेश कीं। लेकिन, वित्त मंत्री का ऐतिहासिक बजट भाषण खत्म होते ही शेयर बाजार में हाहाकार मच गया।

सेंसेक्स में 2 हजार से अधिक अंकाें की गिरावट दर्ज की गई थी। यह भी बीते 22 सालों में रिकॉर्ड रहा।
मनमोहन सिंह के पहले बजट में भी शेयर बाजार ऐसा ही रहा। मनमोहन सिंह के अगुवाई वाली यूपीए सरकार 1 के 2004 के पहले बजट के दौरान सेंसेक्स में ऐसी ही गिरावट आई थी। तब सरकार को समर्थन दे रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एबी वर्धन ने कहा था ‘भाड़ में जाए शेयर बाजार’।
बजट पेश करने के लिए संसद भवन पहुंचने से पहले वित्त मंत्री राष्ट्रपति भवन पहुंची। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वित्त मंत्री को दही-चीनी खिलाई।
बजट से पहले संसद में मोदी सरकार की कैबिनेट बैठक हुई। कैबिनेट से बजट को मंजूरी मिल गई है। 11 बजे वित्त मंत्री ने बजट भाषण पढ़ना शुरू किया।
केंद्र सरकार के 1 फरवरी को पेश किए जा रहे केंद्रीय बजट 2026-27 का कुल आकार लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपए रखा गया है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में बढ़ा हुआ है। इस बजट में सरकार ने खर्च, सामाजिक और आर्थिक विकास, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और योजना आवंटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिये संसाधन निर्धारित किए हैं।
वित्त मंत्री ने दावा किया कि 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। शहरों में नए आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की है। एम्स की तरह 3 आयुर्वेद संस्थान बनाए जाएंगे। 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने की घोषणा भी की। नया आयकर एक्ट 1 अप्रैल से होगा लागू। आयकर फॉर्म को आसान किया जाएगा। राजकोषीय घाटा जीडीपी को 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है। 1 करोड़ रुपए अघोषित आय करने का प्रस्ताव किया गया है।
वित्तमंत्री ने बजट भाषण में बताया कि 2026-27 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे। 16वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। यह राशि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से जुड़े विकास पर खर्च की जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति की रफ्तार सही दिशा में चल रही है और सुधारों की गाड़ी पटरी पर बनी रहेगी। भारत को मजबूत बनाने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों में हस्तक्षेप की योजना है, जिसमें शहरों में आर्थिक क्षेत्रों का विकास भी शामिल है।
EMS सेक्टर में 40 हजार करोड़ रुपए देने, रेयर अर्थ कॉरीडोर बनाने, खनिज कॉरीडोर बनाने और नई नौकरियां पैदा करने की घोषणा की।
बजट पर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है।
जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, ‘हालाँकि दस्तावेज़ों का विस्तार से अध्ययन किया जाना अभी बाकी है, लेकिन 90 मिनट बाद ही यह स्पष्ट हो गया है कि बजट 2026/27 के बारे में जो भारी माहौल बनाया गया था, उसके मुकाबले यह कहीं कमतर रहा है। यह पूरी तरह फीका साबित हुआ। भाषण भी पारदर्शी नहीं था, क्योंकि इसमें प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए बजट आवंटन को लेकर कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।’
अब तक आमतौर पर बजट कार्यदिवस में ही पेश होता रहा है और शेयर बाजार रविवार को बंद रहते थे। लेकिन इस बार सरकार ने निवेशकों, उद्योग जगत और बाजार की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला लिया है।
रविवार को बजट पेश होने और बाजार खुलने से नीतिगत फैसलों पर बाजार की त्वरित प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। निवेशक, कारोबारी और आम जनता की नजरें इस बजट पर टिकी हैं, क्योंकि इसमें महंगाई, टैक्स, रोजगार, किसान, मध्यम वर्ग और आर्थिक विकास से जुड़े अहम ऐलान होने की उम्मीद है।
बजट 2026 को लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में पहले से ही चर्चा तेज है, और रविवार को होने वाला यह बजट परंपराओं से हटकर एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।










