नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेत्री और पूर्व विधायक Alka Lamba को महिला आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले और निषेधाज्ञा उल्लंघन का दोषी पाया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। सजा पर सुनवाई 5 जून को होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला 29 जुलाई 2024 का है, जब जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण की मांग को लेकर एक प्रदर्शन हुआ था। पुलिस के अनुसार, उस समय क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू थी और संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, ‘संसद घेराव’ के नारे लगाए और सड़क पर बैठकर यातायात बाधित किया।
आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों को धक्का दिया गया। पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
अदालत ने लांबा को भारतीय न्याय संहिता की चार धाराओं — 132 (सरकारी कर्तव्य में बाधा डालने के लिए हमला), 221 (सार्वजनिक सेवक को बाधा), 223(a) (वैध आदेश की अवज्ञा) और 285 (सार्वजनिक स्थान पर खतरा उत्पन्न करना) — के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा।
बचाव पक्ष का तर्क था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और निर्धारित स्थल पर आयोजित हुआ था। वकील ने यह भी कहा कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है, चोट की कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं है और वीडियो साक्ष्य में भी अलका लांबा को किसी पुलिसकर्मी पर हमला करते नहीं देखा जा सकता। अदालत ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए दिसंबर 2025 में आरोप तय किए थे और आरोप मुक्ति की याचिका भी खारिज कर दी थी।
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